अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump का प्रशासन एक अनोखी आर्थिक रणनीति पर काम कर रहा है। इसके तहत ईरान पर लगी पाबंदियों में ढील देकर समुद्र में फंसे ईरानी कच्चे तेल को अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतारने की तैयारी है। अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी Scott Bessent ने इस प्रस्ताव के बारे में जानकारी दी है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य दुनिया भर में तेल की कीमतों को कम करना और ईरान की आर्थिक ताकत को कमजोर करना है।

क्या है अमेरिका की यह नई रणनीति और इसका मकसद?

अमेरिका के ट्रेजरी सेक्रेटरी Scott Bessent ने Fox Business पर दिए एक बयान में बताया कि प्रशासन समुद्र में मौजूद 140 मिलियन (14 करोड़) बैरल ईरानी तेल से पाबंदियां हटाने पर विचार कर रहा है। यह तेल करीब 10 से 15 दिनों की वैश्विक सप्लाई के बराबर है। इस भारी मात्रा को अचानक बाजार में लाने से कच्चे तेल के दाम तेजी से गिर सकते हैं। अमेरिका चाहता है कि ईरान के ही तेल का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ किया जाए ताकि ग्लोबल मार्केट में तेल की कीमतें काबू में रहें।

इस फैसले से जुड़े मुख्य बिंदु और नियम

  • इस योजना के जरिए अमेरिका नवंबर में होने वाले चुनावों से पहले ईंधन की कीमतों को कम करना चाहता है।
  • अमेरिकी विदेश मंत्री Mike Pompeo के अनुसार ईरान पर दबाव अभियान को और तेज किया जा रहा है।
  • कच्चे तेल की बिक्री का पैसा सीधे ईरान को नहीं मिलेगा, बल्कि यह अमेरिका के नियंत्रण वाले अकाउंट में जमा होगा।
  • ईरान इस शर्त को मानने से इनकार कर सकता है क्योंकि उसे सीधे पैसे नहीं मिलेंगे।
  • यह चर्चा ऐसे समय में हो रही है जब खाड़ी क्षेत्र में तनाव बढ़ रहा है और सप्लाई में रुकावट की आशंका है।

इस फैसले का असर खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीय प्रवासियों पर भी पड़ सकता है क्योंकि तेल की कीमतों में होने वाले बदलाव का असर सीधे तौर पर वहां की अर्थव्यवस्था और ट्रांसपोर्टेशन खर्चों पर पड़ता है। हालांकि विश्लेषकों का मानना है कि इस कदम से मार्केट में काफी उथल-पुथल मच सकती है और इसे लागू करने में कई कानूनी अड़चनें भी आ सकती हैं।

Aanya

Aanya is Ex IndiaTV Journalist. She covers Expats oriented news, views and interviews With deep understanding of what Hindi Speaking people needs as updates in daily life to avoid fines, comply rules and stay updated.