Trump Administration का ईरान को बड़ा प्रस्ताव, 15 शर्तों के साथ युद्ध खत्म करने और पाबंदियां हटाने की पेशकश
अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump के प्रशासन ने ईरान के साथ चल रहे तनाव को खत्म करने के लिए एक बड़ा प्रस्ताव तैयार किया है। इजरायली मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप प्रशासन ने ईरान के सामने 15 शर्तें रखी हैं। अगर इन शर्तों को माना जाता है, तो ईरान पर लगी अंतरराष्ट्रीय पाबंदियों को हटाया जा सकता है और एक महीने के लिए सीजफायर यानी युद्ध विराम लागू किया जा सकता है। इस प्रस्ताव को व्हाइट हाउस के विशेष दूत Steve Witkoff और Jared Kushner ने मिलकर तैयार किया है।
ईरान के सामने रखी गई 15 प्रमुख शर्तें क्या हैं?
इस नए समझौते के प्रस्ताव में अमेरिका और इजरायल के मुख्य सैन्य उद्देश्यों को शामिल किया गया है। इसका मकसद परमाणु हथियारों के खतरे को पूरी तरह खत्म करना है।
- ईरान को अपने सभी परमाणु हथियारों के कार्यक्रम को पूरी तरह बंद करना होगा।
- ईरान की धरती पर यूरेनियम संवर्धन (Uranium Enrichment) का काम नहीं किया जाएगा।
- ईरान के पास जो यूरेनियम का भंडार है, उसे सौंपना होगा और पुरानी परमाणु सुविधाओं को नष्ट करना होगा।
- ईरान को क्षेत्र में सक्रिय अपने समर्थित समूहों को फंडिंग देना बंद करना होगा।
- Strait of Hormuz को अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए खुला रखना होगा।
- ईरान के मिसाइल कार्यक्रम पर भी कड़ी सीमाएं लागू की जाएंगी।
ईरान की प्रतिक्रिया और तेल बाज़ार पर इसका असर क्या होगा?
ईरान और अमेरिका के बीच चल रही इस प्रक्रिया में अब तक मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिली है। जहां ट्रंप ने बातचीत को सकारात्मक बताया है, वहीं ईरान के अधिकारियों ने अभी सीधी बातचीत से इनकार किया है।
| मुख्य जानकारी | ताजा स्थिति |
|---|---|
| सीजफायर अवधि | एक महीने का समय प्रस्तावित है |
| ईरान की मांग | नुकसान की भरपाई और अधिकारों की सुरक्षा |
| अमेरिकी सैन्य कदम | 1,000 से 5,000 अतिरिक्त Marines भेजे जाएंगे |
| तेल पर राहत | 19 अप्रैल 2026 तक पाबंदियों में ढील दी गई है |
अमेरिका ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को स्थिर रखने के लिए ईरान के कच्चे तेल की बिक्री पर 19 अप्रैल 2026 तक अस्थायी छूट दी है। इस मामले में पाकिस्तान, तुर्की और मिस्र मध्यस्थता की भूमिका निभा रहे हैं। ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने युद्ध खत्म करने के लिए अंतरराष्ट्रीय गारंटी और ईरान के अधिकारों की मांग रखी है। हालांकि अमेरिका ने क्षेत्र में अपनी सुरक्षा बढ़ाने के लिए अतिरिक्त सैनिकों की तैनाती की तैयारी भी शुरू कर दी है।





