ट्रम्प प्रशासन ने अमेरिका के Strategic Petroleum Reserve (SPR) से भारी मात्रा में कच्चा तेल बाजार में उतारने का फैसला किया है। ईरान के साथ जारी तनाव और Strait of Hormuz में तेल की सप्लाई रुकने की वजह से दुनिया भर में तेल की कीमतें लगातार बढ़ रही थीं। इस आर्थिक संकट को कम करने और मार्केट में स्थिरता लाने के लिए अमेरिका ने अपने सुरक्षित भंडार से 17.2 करोड़ बैरल तेल रिलीज किया है। यह अब तक के सबसे बड़े तेल रिलीज में से एक माना जा रहा है।

तेल की सप्लाई और वापसी के नियम क्या हैं?

अमेरिकी ऊर्जा विभाग (DOE) ने स्पष्ट किया है कि यह तेल एक एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत दिया जा रहा है। इसका मतलब है कि तेल लेने वाली कंपनियां भविष्य में इसे वापस भी करेंगी। सरकार की योजना के अनुसार, कंपनियों को लिए गए तेल के बदले 20% अतिरिक्त मात्रा वापस लौटानी होगी। इससे अमेरिकी सरकार के सुरक्षित भंडार में भविष्य में और भी ज्यादा तेल जमा हो जाएगा।

  • कुल रिलीज: राष्ट्रपति ट्रम्प ने 17.2 करोड़ बैरल तेल जारी करने की मंजूरी दी है।
  • अंतरराष्ट्रीय सहयोग: यह कदम IEA देशों के साथ मिलकर उठाया गया है, जो कुल 40 करोड़ बैरल तेल बाजार में लाएंगे।
  • वापसी की शर्त: कंपनियों को 17.2 करोड़ के बदले लगभग 20 करोड़ बैरल तेल वापस करना होगा।
  • शिपमेंट की तारीख: तेल की पहली खेप 21 से 23 मार्च 2026 के बीच भेजी गई है।

इन बड़ी कंपनियों को मिला तेल सप्लाई का जिम्मा

इस पूरी प्रक्रिया में दुनिया की 8 बड़ी तेल कंपनियों को शामिल किया गया है जिन्हें कच्चे तेल के एक्सचेंज के लिए कॉन्ट्रैक्ट दिया गया है। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव Karoline Leavitt ने बताया कि वाशिंगटन और तेहरान के बीच बातचीत जारी है, लेकिन सुरक्षा के लिहाज से यह कदम उठाना जरूरी था।

कंपनी का नाम मुख्य जिम्मेदारी ताजा अपडेट
Shell, BP, Marathon Petroleum कच्चे तेल का उठाव और वितरण कॉन्ट्रैक्ट आवंटित
Trafigura, Vitol, Gunvor मार्केट सप्लाई चैन मैनेजमेंट शिपमेंट शुरू
US Department of Energy भंडार की निगरानी और नियम RFP जारी किया गया
Pentagon सुरक्षा और सैन्य सहयोग अतिरिक्त सेना की तैनाती

ईरान ने हाल ही में कहा है कि वह Strait of Hormuz से गैर-आक्रामक तेल जहाजों को जाने की अनुमति देगा, लेकिन तनाव अब भी बना हुआ है। अमेरिकी सरकार का मानना है कि इस कदम से आम जनता को पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों से राहत मिलेगी और ग्लोबल मार्केट में तेल की कमी नहीं होगी।