अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ा तनाव, सीधे बात करने की कोशिश में जुटा ट्रंप प्रशासन

ट्रंप प्रशासन ने ईरान के मुख्य फैसले लेने वाले अधिकारियों से सीधे बातचीत करने की कोशिश शुरू कर दी है। अमेरिका इस बात का पता लगाना चाहता है कि ईरान सरकार में असल ताकत किसके पास है जिससे चल रहे विवाद को सुलझाया जा सके। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी अधिकारियों ने मई महीने के बीच में एक गुप्त माध्यम का इस्तेमाल किया था। इसमें कुर्दिस्तान क्षेत्र के राष्ट्रपति नेचिर्वन बारजादी को बीच का व्यक्ति बनाया गया था ताकि इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC के कमांडर जनरल अहमद वाहिदी से संपर्क किया जा सके। हालांकि तमाम कोशिशों के बावजूद, जिसमें 17 जून 2026 को साइन किया गया एक असफल समझौता भी शामिल है, कूटनीति के मोर्चे पर कोई खास सफलता नहीं मिली है।
समझौता टूटने के बाद फिर भड़की दुश्मनी
ईरान के विदेश मंत्री अराघची ने आरोप लगाया कि अमेरिका ने हाल ही में हुए समझौते का उल्लंघन किया है, जिसके बाद दोनों देशों के बीच दुश्मनी फिर से तेज हो गई है। अराघची ने साफ कर दिया कि ईरान युद्धविराम की समय सीमा को आगे नहीं बढ़ाएगा और आगे बातचीत को लेकर अभी कोई फैसला नहीं लिया गया है। इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने स्ट्रेट ऑफ होरमुज को अमेरिकी क्षेत्र घोषित करने का इरादा जताया है, जिसका ईरान ने कड़ा विरोध किया है। इस पूरे घटनाक्रम के बीच ईरानी संसद स्ट्रेट ऑफ होरमुज की कानूनी निगरानी पर चर्चा करने के लिए बैठक करने वाली है।
खाड़ी देशों में चिंता का माहौल
अमेरिका की इस रणनीति के लंबे समय तक रहने वाले असर को लेकर खाड़ी देशों के साथी बहुत परेशान हैं। ईरान और अमेरिका के बीच इस तरह की खींचतान से पूरे क्षेत्र में तनाव का माहौल बना हुआ है। ईरान की संसद में होने वाली बैठक के बाद यह साफ हो पाएगा कि आगे की स्थिति क्या होगी। आम लोग और अधिकारी इस बात को लेकर फिक्रमंद हैं कि अगर हालात जल्द नहीं सुधरे तो इसका बुरा असर पूरे इलाके की सुरक्षा और शांति पर पड़ेगा। अमेरिका सीधे तौर पर यह समझने में लगा है कि ईरान की तरफ से अंतिम फैसला लेने का अधिकार असल में किसके हाथ में है।