अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप का प्रशासन ईरान के परमाणु भंडार को अपने कब्जे में लेने या वहां से सुरक्षित बाहर निकालने के लिए अलग-अलग विकल्पों पर विचार कर रहा है। CBS News की रिपोर्ट के अनुसार, वाशिंगटन में अधिकारी इस योजना पर गंभीरता से काम कर रहे हैं। हालांकि राष्ट्रपति ट्रंप ने अभी तक इस सैन्य ऑपरेशन के लिए हरी झंडी नहीं दी है लेकिन इसे एक बड़े विकल्प के रूप में देखा जा रहा है। व्हाइट हाउस और खुफिया एजेंसियां इस पर लगातार चर्चा कर रही हैं।

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ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर क्या है अमेरिका का रुख?

अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि ईरान के परमाणु हथियारों तक पहुंचने की कोशिशों को रोकना उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकता है। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव Karoline Leavitt ने बताया कि स्टॉकपाइल को वापस लेना मेज पर मौजूद विकल्पों में से एक है। विदेश मंत्री Marco Rubio ने भी कहा है कि इस मिशन का मकसद ईरान की मिसाइल ताकत को खत्म करना है। खुफिया एजेंसी की प्रमुख Tulsi Gabbard ने गवाही दी है कि अमेरिकी हमलों ने ईरान के परमाणु केंद्रों और भूमिगत ठिकानों को काफी हद तक तबाह कर दिया है।

क्या परमाणु सामग्री को जब्त करना इतना आसान है?

IAEA के महानिदेशक Rafael Grossi ने इस पूरे ऑपरेशन को बहुत ही मुश्किल और खतरनाक बताया है। उनके मुताबिक, 60 प्रतिशत तक संवर्धित यूरेनियम (enriched uranium) के गैस सिलेंडरों को सुरक्षित रूप से निकालना एक बड़ी सैन्य चुनौती है। विशेषज्ञों का कहना है कि इसके लिए उन्नत सैन्य तकनीक और बड़ी संख्या में सैनिकों की जरूरत होगी। इस ऑपरेशन से जुड़ी कुछ खास बातें नीचे दी गई हैं:

  • सैनिकों की जरूरत: सैन्य जानकारों के अनुसार हर एक साइट पर कब्जा करने के लिए 1000 से अधिक सैनिकों की जरूरत पड़ सकती है।
  • इजरायल का दावा: प्रधानमंत्री Netanyahu ने कहा है कि ईरान अब यूरेनियम संवर्धित करने की अपनी क्षमता खो चुका है।
  • मौजूदा स्थिति: राष्ट्रपति ट्रंप ने 21 मार्च 2026 को संकेत दिया कि वे अब ईरान में सैन्य अभियानों को कम करने पर विचार कर रहे हैं।
  • तेल की कीमतें: युद्ध के दौरान ईंधन के दाम कम रखने के लिए अमेरिका ने ईरान के समुद्री तेल पर से कुछ पाबंदियां हटाई हैं।