अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। डोनाल्ड ट्रंप के एक सलाहकार ने कहा है कि ईरान के नेताओं को सिर्फ बमों की भाषा समझ आती है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब दोनों देशों के बीच बातचीत की कोशिशें नाकाम होती दिख रही हैं और युद्ध का खतरा बढ़ गया है।

ट्रंप प्रशासन और ईरान के बीच क्या चल रहा है?

डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ बहुत सख्त रुख अपनाया है। 28 फरवरी 2026 को ट्रंप ने ईरान के मिसाइल उद्योग को पूरी तरह तबाह करने और उनकी नौसेना को खत्म करने की बात कही थी। उन्होंने साफ शब्दों में कहा था कि ईरान को किसी भी कीमत पर परमाणु हथियार नहीं मिलने चाहिए। 7 अप्रैल 2026 को उन्होंने नागरिक ठिकानों पर हमले की धमकी दी थी, लेकिन बाद में शर्त रखी कि अगर ईरान दो हफ्ते के लिए युद्धविराम करे और होर्मुज जलडमरूमध्य को खोले, तो वह पीछे हट सकते हैं।

ईरान के शांति प्रस्ताव को अमेरिका ने क्यों ठुकराया?

28 अप्रैल 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप ने ईरान के ताजा शांति प्रस्ताव को स्वीकार करने से मना कर दिया। ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में समुद्री यातायात फिर से शुरू करने का प्रस्ताव दिया था, लेकिन परमाणु कार्यक्रम पर चर्चा को भविष्य के लिए टालना चाहा था। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव Karoline Leavitt और सहायक प्रेस सचिव Olivia Wales ने साफ किया कि अमेरिका केवल ऐसे समझौते करेगा जिससे उसके हितों की रक्षा हो और ईरान परमाणु हथियार न बना सके।

दुनिया और मानवाधिकार संगठनों की इस पर क्या राय है?

अम्नेस्टी इंटरनेशनल की महासचिव Agnès Callamard ने ट्रंप की धमकियों को बहुत खतरनाक बताया। उन्होंने चेतावनी दी कि इस तरह के बयान युद्ध अपराधों की श्रेणी में आ सकते हैं। वहीं, ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi शांति के लिए रूस और पाकिस्तान का दौरा भी कर चुके हैं, लेकिन अमेरिकी प्रशासन के कड़े रुख के कारण अब तक कोई ठोस नतीजा नहीं निकला है।

Frequently Asked Questions (FAQs)

ट्रंप प्रशासन ने ईरान के बारे में क्या चेतावनी दी?

डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के मिसाइल उद्योग को पूरी तरह खत्म करने और उनकी नौसेना को तबाह करने की चेतावनी दी है ताकि ईरान परमाणु हथियार न बना सके।

ईरान ने शांति के लिए क्या प्रस्ताव रखा था?

ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही फिर से शुरू करने का प्रस्ताव दिया था, लेकिन परमाणु मुद्दे पर बातचीत को बाद के लिए टालने की बात कही थी।