अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने 16 मार्च 2026 को बड़ा दावा किया है कि अमेरिकी सेना ने ईरान की सेना और नौसेना को पूरी तरह से खत्म कर दिया है। अमेरिका ने ईरान पर अब तक 7,000 से ज्यादा सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। वहीं खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों के लिए राहत की खबर है कि दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर ड्रोन हमले के बाद विमानों की आवाजाही फिर से चालू हो गई है। मिडिल ईस्ट में अमेरिका अपना सैन्य अभियान ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ पूरी ताकत के साथ चला रहा है।

ईरान के कितने हथियारों और ठिकानों को नुकसान पहुंचा?

अमेरिकी रक्षा सचिव Pete Hegseth के अनुसार अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमलों से ईरान की सैन्य ताकत काफी कम हो गई है। ऑपरेशन लगातार जारी है और अब तक हुए नुकसान के मुख्य आंकड़े इस प्रकार हैं:

  • 7,000 से ज्यादा ठिकाने: अमेरिका ने ईरान के 7 हजार से ज्यादा सैन्य ठिकानों पर बमबारी की है।
  • 100 से अधिक नेवी जहाज नष्ट: ईरान के 100 से ज्यादा नेवी के जहाज समुद्र में डुबो दिए गए हैं जिनमें 30 माइन-लेइंग शिप भी शामिल हैं।
  • हथियारों में भारी कमी: ईरान के मिसाइल हमलों में 90 प्रतिशत और ड्रोन हमलों में 95 प्रतिशत की गिरावट आई है।
  • एयर डिफेंस तबाह: ईरान के लगभग 85 प्रतिशत रडार और एयर डिफेंस सिस्टम पूरी तरह बेअसर कर दिए गए हैं।
  • सुप्रीम लीडर का विमान: तेहरान के मेहराबाद एयरपोर्ट पर एक सटीक हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर के आधिकारिक विमान को भी नष्ट कर दिया गया है।

सऊदी अरब, UAE और प्रवासियों पर इसका क्या असर है?

गल्फ देशों में काम करने वाले भारतीयों और प्रवासियों के मन में सुरक्षा को लेकर काफी चिंता बनी हुई है। हालात को देखते हुए सऊदी अरब ने अपने पूर्वी इलाके में आने वाले करीब 60 ड्रोन को हवा में ही मार गिराया है। दूसरी तरफ UAE ने भी 6 बैलिस्टिक मिसाइलों और 21 ड्रोन को सफलतापूर्वक रोका है।

दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट के एक फ्यूल टैंक पर ड्रोन से हमला हुआ था जिससे वहां आग लग गई थी। अच्छी बात यह है कि इस हादसे में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है और एयरपोर्ट पर यात्रियों के लिए विमानों का संचालन फिर से शुरू हो गया है। इसके अलावा समुद्र में Strait of Hormuz के बंद होने से पूरी दुनिया में कच्चे तेल की कीमत 100 से 105 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है जिसका असर आम लोगों की जेब पर पड़ सकता है।

अमेरिका अब आगे क्या कदम उठा रहा है?

राष्ट्रपति Trump ने मांग की है कि ब्रिटेन, फ्रांस और जापान समेत कम से कम सात देश अपने युद्धपोत Strait of Hormuz में भेजें ताकि समुद्र के रास्ते तेल का व्यापार सुरक्षित हो सके। दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत कच्चा तेल इसी रास्ते से गुजरता है। यूरोपीय देशों ने अभी इस मांग पर कोई सीधा जवाब नहीं दिया है।

अमेरिका मिडिल ईस्ट में अतिरिक्त 5,000 सैनिक और कई नए युद्धपोत भेज रहा है। अमेरिकी सेना ने साफ कह दिया है कि अगर ईरान की सेना (IRGC) हथियार डाल देती है तो उन्हें छोड़ दिया जाएगा वरना उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। वहीं ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची का कहना है कि वे सीजफायर नहीं चाहते और आगे भी अपना बचाव करते रहेंगे।

Aanya

Aanya is Ex IndiaTV Journalist. She covers Expats oriented news, views and interviews With deep understanding of what Hindi Speaking people needs as updates in daily life to avoid fines, comply rules and stay updated.