अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने 16 मार्च 2026 को एक बड़ा ऐलान करते हुए बताया है कि ईरान की मिसाइल और ड्रोन क्षमता लगभग खत्म हो चुकी है। अमेरिका ने ईरान के 7000 से ज्यादा ठिकानों पर हमले किए हैं, जिसके बाद ईरान की 90% बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्च क्षमता और 95% ड्रोन हमले की ताकत कम हो गई है। “Operation Epic Fury” नाम का यह सैन्य अभियान 28 फरवरी को शुरू किया गया था।

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ईरान के सैन्य ठिकानों को कितना नुकसान हुआ?

इस ऑपरेशन में अमेरिका ने ईरान के कई अहम ठिकानों को निशाना बनाया है। व्हाइट हाउस और पेंटागन के अधिकारियों के अनुसार, ईरान का एयर डिफेंस और एयरफोर्स पूरी तरह से तबाह हो चुका है। राष्ट्रपति Trump ने स्पष्ट कहा कि ईरान के रडार और एंटी-एयरक्राफ्ट हथियार अब खत्म हो चुके हैं और उनके टॉप लीडर भी नहीं बचे हैं।

  • ईरान के 100 से ज्यादा नेवी जहाज डूब गए हैं या नष्ट कर दिए गए हैं।
  • इनमें 30 माइन-लेइंग शिप और एक बहुत बड़ा ड्रोन कैरियर जहाज शामिल है।
  • CENTCOM के कमांडर Admiral Brad Cooper ने पुष्टि की है कि पहले दिन के मुकाबले अब मिसाइल लॉन्च 90% तक घट गए हैं।
  • डिफेंस सेक्रेटरी Pete Hegseth ने बताया कि अमेरिका और इजराइल मिलकर बचे हुए न्यूक्लियर और मिसाइल ठिकानों को भी निशाना बना रहे हैं।

सऊदी अरब और तेल की कीमतों पर क्या असर पड़ा?

इस संघर्ष का सीधा असर मिडिल ईस्ट की सुरक्षा और अर्थव्यवस्था पर पड़ा है। सऊदी अरब के रक्षा मंत्रालय ने जानकारी दी है कि 16 मार्च से पहले के कुछ दिनों में उन्होंने लगभग 50 से 51 ईरानी ड्रोन को मार गिराया है। ये ड्रोन सऊदी के पूर्वी और मध्य प्रांतों, खास तौर पर रियाद की तरफ आ रहे थे। सऊदी अरब की मुस्तैदी के कारण इन हमलों को नाकाम कर दिया गया।

दूसरी तरफ, युद्ध के कारण दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया था। आम लोगों और अर्थव्यवस्था को राहत देने के लिए Trump ने कहा है कि वह तेल की कीमतों को स्थिर करने के लिए कुछ पाबंदियों में छूट देंगे। इसके अलावा तेल की सप्लाई बिना रुके चलती रहे, इसके लिए US Navy अब तेल टैंकरों को सुरक्षा देते हुए एस्कॉर्ट करेगी।