अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान के साथ एक समझौते का ऐलान किया है। उन्होंने कहा है कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को तुरंत खोला जाएगा और अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी हटा ली जाएगी। यह फैसला दुनिया भर के व्यापार और तेल की कीमतों के लिए बहुत अहम माना जा रहा है।
समझौते की शर्तें और चेतावनी
Trump ने बताया कि 19 जून 2026 को इस समझौते पर औपचारिक रूप से हस्ताक्षर होंगे, जिसके बाद यह रास्ता पूरी तरह खुल जाएगा। हालांकि, उन्होंने यह चेतावनी भी दी है कि यह डील अभी पूरी तरह फाइनल नहीं है। उन्होंने साफ कहा कि अगर ईरान ने सही व्यवहार नहीं किया, तो अमेरिका फिर से बमबारी शुरू कर सकता है।
पाकिस्तान की भूमिका और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
इस पूरे मामले में पाकिस्तान ने मध्यस्थ के तौर पर काम किया है और समझौते की पुष्टि की है। औपचारिक हस्ताक्षर समारोह स्विट्जरलैंड में आयोजित किया जाएगा। NATO के चीफ Mark Rutte ने इस खबर का स्वागत किया है और इसे एक बहुत बड़ा कदम बताया है।
समुद्री रास्ते में माइन का खतरा
भले ही समझौता हो गया है, लेकिन समुद्री विशेषज्ञों ने सावधानी बरतने को कहा है। बताया गया है कि ईरान ने इस रास्ते में बहुत सारे माइन बिछाए हुए हैं, जिसकी वजह से करीब 500 से ज़्यादा जहाज़ फंसे हुए हैं। इन माइन को हटाने में कुछ हफ़्तों से लेकर महीनों तक का समय लग सकता है, तभी व्यापार पूरी तरह सामान्य होगा।
कानूनी विवाद और सर्विस फीस
अंतरराष्ट्रीय कानून (UNCLOS) के मुताबिक इस रास्ते से सभी जहाजों को गुजरने का हक है और इसके लिए कोई पैसा नहीं लिया जा सकता। लेकिन ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmaeil Baqaei ने कहा है कि जहाजों को यहाँ सुविधाओं के लिए ‘सर्विस फीस’ देनी होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह नियम अंतरराष्ट्रीय कानूनों के खिलाफ है।
क्षेत्रीय तनाव और तेल की स्थिति
इस समझौते के बीच इसराइल ने लेबनान में अपने सीमित हमले जारी रखे हैं, जिसे ईरान समझौते का उल्लंघन मान रहा है। राष्ट्रपति Trump ने लेबनान में इसराइल के सैन्य तरीकों की आलोचना की है। दूसरी तरफ, इस समझौते की खबर से बाजार में सकारात्मक माहौल है और तेल की कीमतों में स्थिरता आई है।