US President Trump की लोकप्रियता गिरी 33% तक, ईरान के साथ चल रहे लंबे युद्ध के कारण हुआ भारी नुकसान.

अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump की लोकप्रियता गिरकर सीधे 33% पर आ गई है। यह आंकड़ा Reuters/Ipsos द्वारा किए गए पोल में सामने आया है, जो उनके दोनों कार्यकाल का सबसे निचला स्तर है। यह चार दिनों का सर्वे सोमवार, 24 अगस्त 2026 को पूरा हुआ था, जिसमें पूरे देश से 1,215 अमेरिकी वयस्क शामिल हुए थे। इस सर्वे में 3 प्रतिशत तक की मार्जिन ऑफ एरर बताई गई है। अमेरिका और इजराइल के हमलों के बाद 28 फरवरी 2026 को शुरू हुए इस सैन्य संघर्ष को लेकर जनता का समर्थन भी लगातार कम हो रहा है और अब यह सिर्फ 31% पर पहुंच गया है, जो मार्च में 37% और अगस्त की शुरुआत में 34% था। इस पूरी जानकारी के बारे में आप ANI News पर विस्तार से पढ़ सकते हैं।
रिपब्लिकन समर्थकों का समर्थन भी हुआ कम
इस युद्ध के समर्थन में रिपब्लिकन पार्टी के मतदाताओं का रुख भी बदला है। मार्च महीने में जहां 77% रिपब्लिकन इस युद्ध के समर्थन में थे, वहीं अब यह समर्थन घटकर 69% रह गया है। इसके अलावा, अमेरिका के करीब 83% लोगों का यह मानना है कि यह संघर्ष अभी और लंबे समय तक चलने वाला है, जबकि महीने की शुरुआत में 80% लोग ऐसा सोचते थे। राष्ट्रपति की लोकप्रियता में इस बड़ी गिरावट के पीछे सबसे बड़ा कारण पेट्रोल और डीजल की कीमतें हैं। युद्ध से पहले के मुकाबले गैलन की कीमतें आज भी एक डॉलर से ज्यादा महंगी बनी हुई हैं, जो आने वाले 3 नवंबर के मध्यावधि चुनावों से पहले एक बहुत बड़ा मुद्दा बन गया है। स्वतंत्र मतदाता यानी इंडिपेंडेंट वोटर कांग्रेस के चुनाव में डेमोक्रेट्स को ज्यादा पसंद कर रहे हैं और उन्हें 33% से 19% के अंतर से आगे रख रहे हैं.
ट्रेजरी सेक्रेटरी Scott Bessent का नया कदम
इस गंभीर स्थिति से निपटने के लिए ट्रेजरी सेक्रेटरी Scott Bessent ने एक नए अभियान का ऐलान किया है। इस अभियान का नाम "Operation Economic Outcast" रखा गया है, जिसका मुख्य उद्देश्य ईरान के सभी कमाई के जरियों को पूरी तरह से बंद करना है। अमेरिका ने ईरान के हथियारों की खरीद-फरोख्त, अमेरिका की ऊर्जा और रक्षा बुनियादी ढांचे पर साइबर हमले करने वाले लोगों और अवैध रूप से तेल भेजने वाले समूहों पर नए प्रतिबंध लगा दिए हैं। सेक्रेटरी Scott Bessent ने यह भी साफ किया है कि प्रशासन उन सभी देशों या कंपनियों के खिलाफ प्रतिबंधों को और बढ़ा सकता है जो ईरान के साथ अपना व्यापार जारी रखते हैं। आम जनता के बीच महंगाई और युद्ध के कारण चिंता बढ़ती जा रही है और इसका सीधा असर राजनीतिक पार्टियों की साख पर पड़ रहा है.