अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की है कि स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज़ (Strait of Hormuz) अब खुला रहेगा। उन्होंने साफ कहा है कि इस रणनीतिक समुद्री रास्ते पर अब कोई और नेवल ब्लॉकेड (नौसैनिक नाकाबंदी) नहीं लगाई जाएगी।

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रास्ता खोलने के आश्वासन के साथ ट्रंप ने यह भी बताया कि अमेरिकी नौसेना के जहाज़ इस इलाके में मौजूद रहेंगे। उन्होंने कहा कि सुरक्षा और स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए ज़रूरत पड़ने पर सभी अमेरिकी जहाज़ अपनी जगह पर तैनात रहेंगे।

कैसे शुरू हुआ विवाद और क्या हुआ समाधान

इस पूरे मामले की शुरुआत अप्रैल 2026 में हुई थी जब पाकिस्तान में अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत नाकाम रही थी। इसके बाद 11 से 13 अप्रैल के बीच राष्ट्रपति ट्रंप ने आदेश दिया था कि अमेरिकी नौसेना ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी कर दे।

  • 4 मई 2026: कमर्शियल जहाज़ों को सुरक्षित रास्ता दिखाने के लिए ‘ऑपरेशन प्रोजेक्ट फ्रीडम’ शुरू किया गया।
  • 11 जून 2026: ट्रंप ने बताया कि अमेरिकी सेना ने पिछले एक महीने में 200 से ज़्यादा जहाज़ों को गुज़रने में गुप्त मदद की है।
  • 14 जून 2026: अमेरिका और ईरान ने विवाद खत्म करने और रास्ता खोलने का समझौता किया।
  • 17 जून 2026: राष्ट्रपति ट्रंप और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने युद्ध खत्म करने के लिए एक समझौते (MOU) पर साइन किए।

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने 18 जून को कन्फर्म किया कि अब ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी पूरी तरह हटा ली गई है। अब जहाज़ों को आने-जाने में कोई रुकावट नहीं होगी। हालांकि, निगरानी के लिए USS अब्राहम लिंकन जैसे विमान वाहक जहाज़ और डिस्ट्रॉयर्स अभी भी वहां मौजूद हैं ताकि समझौते का पालन हो सके।

60 दिनों का युद्धविराम और शर्तें

सरकार के मुताबिक, ब्लॉकेड हटाने का यह फैसला एक शुरुआती समझौते का हिस्सा है। इसमें 60 दिनों का युद्धविराम तय किया गया है। इस समय के दौरान औपचारिक बातचीत होगी ताकि ईरान पर लगे प्रतिबंध हटाए जा सकें, उसकी जमा संपत्ति वापस मिल सके और वह परमाणु हथियार न बनाने की बात पर सहमत हो।

शिपिंग और अंतरराष्ट्रीय नियमों पर असर

भले ही रास्ता खुल गया है, लेकिन कुछ चिंताएं अब भी बनी हुई हैं। ईरानी अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि 60 दिन की अवधि खत्म होने के बाद वे इस रास्ते से गुज़रने वाले जहाज़ों से ट्रांजिट फीस वसूल सकते हैं। यह नियम 1982 के संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून (UNCLOS) के खिलाफ होगा, जो बिना किसी रुकावट के आवाजाही की बात करता है।

फिलहाल स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज़ में जहाज़ों की आवाजाही बढ़ गई है, लेकिन यह युद्ध से पहले के स्तर से काफी कम है। शिपिंग कंपनियां अभी भी सावधानी बरत रही हैं और सुरक्षित रास्तों और नौसैनिक सुरक्षा की जानकारी मांग रही हैं। ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर युद्धविराम और समझौते का पालन नहीं हुआ तो अमेरिका फिर से सैन्य कार्रवाई कर सकता है।

Nura Basta

Nura Basta is the Editor at GulfHindi.com and a journalism graduate from IIMC Delhi. With more than 7 years of professional experience, he has worked with leading media organizations including Aaj Tak (2018–2021) and Gulf News (2021–2025). His reporting and editorial work primarily focus on Gulf news, current affairs, and issues relevant to the Indian diaspora. At GulfHindi.com, he is committed to providing credible, well-researched, and impactful content for Hindi readers in the Gulf.