अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ एक बड़े समझौते को लेकर बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि ईरान के साथ डील लगभग तय हो चुकी है और इसकी घोषणा जल्द ही की जा सकती है। ट्रंप ने इस डील को लेकर ’50/50′ का अनुमान लगाया है और साथ ही चेतावनी भी दी है कि यदि बातचीत विफल रही तो गंभीर परिणाम हो सकते हैं। दूसरी तरफ, ईरान ने ट्रंप के इस दावे को सिरे से खारिज करते हुए इसे सच्चाई से दूर और अधूरा बताया है। दोनों देशों के बीच चल रही इस बातचीत ने खाड़ी क्षेत्र में हलचल बढ़ा दी है।

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डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान समझौते को लेकर क्या दावे किए?

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 23 मई 2026 को दावा किया कि ईरान के साथ एक समझौते पर काफी हद तक बातचीत पूरी हो चुकी है और जल्द ही इसकी घोषणा की जाएगी। ट्रंप के अनुसार, इस समझौते में रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को खोलना भी शामिल होगा। ट्रंप ने चेतावनी देते हुए कहा कि बातचीत सफल होने की 50/50 उम्मीद है, लेकिन अगर बातचीत टूटती है तो अमेरिका सख्त सैन्य कार्रवाई कर सकता है। उन्होंने सऊदी अरब, यूएई, कतर, पाकिस्तान, तुर्की, मिस्र, जॉर्डन और बहरीन के नेताओं के साथ-साथ इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से भी इस शांति समझौते को लेकर बातचीत की बात कही है।

ईरान ने ट्रंप के दावों पर क्या जवाब दिया?

ईरान ने 24 मई 2026 को ट्रंप के इन दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया। ईरान की सरकारी मीडिया और समाचार एजेंसी फार्स (Fars) ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य पर पूरी तरह से ईरान का ही नियंत्रण रहेगा। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने कहा कि दोनों देशों के बीच बातचीत आगे बढ़ रही है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि सभी मुख्य मुद्दों पर सहमति बन गई है। ईरान ने स्पष्ट किया है कि वह एक 14-सूत्रीय ढांचागत समझौता तैयार कर रहा है और अंतिम समझौते तक पहुंचने में 30 से 60 दिनों का समय लग सकता है। ईरान के मुख्य वार्ताकार ने साफ कर दिया है कि देश के राष्ट्रीय अधिकारों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

इस बातचीत के पीछे मध्यस्थ देश कौन हैं और क्या है मुख्य विवाद?

अमेरिका और ईरान के बीच चल रही इस बातचीत में पाकिस्तान और कतर मुख्य मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं। पाकिस्तान के सैन्य अधिकारी और कतर के अमीर इस समझौते को अमलीजामा पहनाकर तनाव कम करने की कोशिशों में जुटे हैं। इस वार्ता का मुख्य उद्देश्य उस संघर्ष को पूरी तरह रोकना है जो 28 फरवरी से शुरू हुआ था। फिलहाल दोनों देशों के बीच एक नाजुक संघर्षविराम लागू है, जिसे ट्रंप ने अप्रैल में आगे बढ़ाया था। हालांकि, परमाणु कार्यक्रम और रणनीतिक समुद्री रास्तों पर नियंत्रण को लेकर अभी भी दोनों पक्षों के बीच गहरे मतभेद बने हुए हैं। खाड़ी देशों के नेता लगातार अमेरिका और ईरान से बातचीत के जरिए मामला सुलझाने की अपील कर रहे हैं ताकि क्षेत्र में दोबारा तनाव न बढ़े।

Frequently Asked Questions (FAQs)

डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के बीच समझौते की मुख्य शर्तें क्या हैं?

डोनाल्ड ट्रंप के अनुसार समझौते में होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलना शामिल है। वहीं ईरान का कहना है कि वे एक 14-सूत्रीय समझौते का प्रस्ताव तैयार कर रहे हैं और राष्ट्रीय अधिकारों पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

इस समझौते में कौन-कौन से देश मध्यस्थता कर रहे हैं?

इस बातचीत को सफल बनाने के लिए पाकिस्तान के सुरक्षा अधिकारी और कतर के वरिष्ठ अधिकारी सक्रिय रूप से मध्यस्थता कर रहे हैं।

Praggya Singh sabal

Journalist from Noida. Covering Delhi, NCR and National Updates.