अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने दावा किया कि ईरान उनके साथ समझौता करने के लिए बेताब है। वहीं दूसरी तरफ अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी पुष्टि की है कि दोनों देशों के बीच बातचीत में थोड़ी प्रगति हुई है, लेकिन उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि ईरान को कभी भी परमाणु हथियार बनाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

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डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ समझौते पर क्या दावा किया?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में कहा कि ईरान के साथ बातचीत गंभीर मोड़ पर है। उन्होंने 18 मई 2026 को दिए अपने एक बयान में बताया कि खाड़ी देशों जैसे सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और कतर के नेताओं के अनुरोध पर उन्होंने ईरान पर होने वाले सैन्य हमले को फिलहाल टाल दिया था। ट्रंप ने दावा किया कि ईरान बातचीत की मेज पर आने और समझौता करने के लिए तैयार है। हालांकि, अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि किसी भी समझौते में ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर पूरी तरह रोक लगाना सबसे मुख्य शर्त होगी।

बातचीत में क्या प्रगति हुई और कौन से देश कर रहे हैं मध्यस्थता?

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने 22 मई 2026 को बताया कि ईरान के साथ चल रही बातचीत में थोड़ी प्रगति देखने को मिली है। इस बातचीत में पाकिस्तान मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है, जिसके गृह मंत्री ने हाल ही में तेहरान में ईरान के विदेश मंत्री के साथ महत्वपूर्ण बैठकें की हैं। दूसरी ओर, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू इस बातचीत से खुश नहीं हैं और उन्होंने ट्रंप के इस रुख पर अपनी नाराजगी जताई है। इसके अलावा, यूरोपियन यूनियन ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) की नाकाबंदी को लेकर ईरान के अधिकारियों पर नए प्रतिबंध लगाने की तैयारी शुरू कर दी है।

Frequently Asked Questions (FAQs)

क्या अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध की स्थिति टल गई है?

हां, मध्य-अप्रैल 2026 में दोनों देशों के बीच युद्धविराम हुआ था। इसके बाद 18 मई को डोनाल्ड ट्रंप ने खाड़ी देशों के अनुरोध पर होने वाले सैन्य हमले को टाल दिया और बातचीत का रास्ता चुना।

अमेरिका की इस समझौते में मुख्य मांग क्या है?

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के अनुसार, मुख्य मांग यह है कि ईरान कभी भी परमाणु हथियार हासिल न करे और हॉर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोले।