डोनाल्ड Trump ने Fox News को बताया कि ईरान की हालत बहुत खराब है और अमेरिका ने उनकी नौसेना और एयरफोर्स को पूरी तरह खत्म कर दिया है। उन्होंने कहा कि पोर्ट्स की नाकाबंदी बहुत असरदार रही जिससे ईरान के पास अब पैसा नहीं बचा है। इस दावे के बाद अब यह चर्चा तेज़ हो गई है कि अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा यह तनाव जल्द खत्म हो सकता है।
Trump और अमेरिकी अधिकारियों ने क्या दावे किए?
डोनाल्ड Trump ने कहा कि अमेरिका ने ईरान की पूरी नौसेना को खत्म कर दिया है और अब उनके पास कोई एयरफोर्स नहीं बची है। अमेरिकी प्रशासन के अन्य अधिकारियों ने भी इस बात का समर्थन किया है।
- रक्षा सचिव Pete Hegseth: उन्होंने ‘Operation Epic Fury’ को एक ऐतिहासिक जीत बताया और कहा कि ईरान की सेना अब लड़ने की स्थिति में नहीं है।
- पेंटागन प्रवक्ता Sean Parnell: उन्होंने जानकारी दी कि अमेरिका ने ईरान के 13,000 से ज्यादा लक्ष्यों पर हमला किया और उनकी नौसेना के 92 प्रतिशत बड़े जहाजों को तबाह कर दिया।
क्या वाकई ईरान की सैन्य ताकत खत्म हो गई है?
जहाँ एक तरफ सरकार बड़े दावे कर रही है, वहीं दूसरी तरफ कुछ अमेरिकी अधिकारी और खुफिया एजेंसियां अलग बात कह रही हैं। CBS News के मुताबिक कुछ अधिकारियों का मानना है कि ईरान के पास अभी भी काफी ताकत बची है।
- DIA के प्रमुख Lt. Gen. James Adams: उन्होंने सांसदों को बताया कि ईरान के पास अभी भी हजारों मिसाइलें और ड्रोन हैं जो अमेरिकी सेना के लिए खतरा बन सकते हैं।
- खुफिया रिपोर्ट: रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान की एयरफोर्स का दो-तिहाई हिस्सा और IRGC की नौसेना का करीब 60 प्रतिशत हिस्सा अब भी काम कर रहा है।
- ईरान का जवाब: ईरान के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि उनकी सेना किसी भी हमले का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है।
युद्ध और तनाव के बीच अब तक क्या हुआ?
पिछले कुछ दिनों में इस संघर्ष को लेकर कई बड़ी हलचलें देखने को मिली हैं। अमेरिका ने कुछ कदम उठाए तो वहीं ईरान ने अपनी रणनीति बदली है।
- सीजफायर: डोनाल्ड Trump ने ईरान के साथ युद्धविराम (ceasefire) को अनिश्चित काल के लिए बढ़ा दिया है।
- बातचीत में रुकावट: उपराष्ट्रपति JD Vance की पाकिस्तान यात्रा रद्द कर दी गई क्योंकि ईरान ने वहां आने से मना कर दिया।
- जहाज की जब्ती: अमेरिकी नौसेना ने अरब सागर में ईरान के एक टैंकर M/V Touska को पकड़ लिया है।
- आंतरिक स्थिति: खबर है कि ईरान में IRGC ने सरकारी कामकाज पर अपना नियंत्रण बढ़ा लिया है और राष्ट्रपति की नियुक्तियों को रोका है।