अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान के बंदरगाहों की समुद्री नाकेबंदी कर दी है। Trump का दावा है कि नाकेबंदी शुरू होते ही ईरान ने उनसे संपर्क किया और वे अब बहुत बुरी तरह से डील करना चाहते हैं। यह बड़ा कदम पाकिस्तान में हुई शांति वार्ता के विफल होने के बाद उठाया गया है।

ईरान पर नाकेबंदी क्यों हुई और क्या हैं नियम?

13 अप्रैल 2026 से Strait of Hormuz में ईरान के बंदरगाहों की नाकेबंदी शुरू हो गई है। US Central Command (CENTCOM) ने साफ किया कि यह नियम उन सभी जहाजों पर लागू होगा जो ईरानी पोर्ट्स में जा रहे हैं या वहां से निकल रहे हैं। Donald Trump ने आदेश दिया है कि जो जहाज ईरान को टैक्स देंगे उन्हें नहीं छोड़ा जाएगा और समुद्र में बिछाई गई माइन्स को नष्ट किया जाएगा। यह तनाव तब बढ़ा जब पाकिस्तान के इस्लामाबाद में हुई बातचीत में ईरान परमाणु हथियार छोड़ने के लिए तैयार नहीं हुआ।

दुनिया के देशों की प्रतिक्रिया और असर

इस नाकेबंदी की वजह से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी हलचल है। कई देशों ने अमेरिका का साथ देने से मना कर दिया है जबकि तेल की कीमतों में बड़ा उछाल देखा गया है।

संस्था/देश प्रतिक्रिया/स्थिति
NATO देश UK, जर्मनी, स्पेन और इटली जैसे देशों ने नाकेबंदी में शामिल होने से मना किया
ईरान नाकेबंदी को समुद्री डकैती बताया और सख्त जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी
चीन ईरान को नए एयर डिफेंस सिस्टम देने की तैयारी कर रहा है
फ्रांस नेविगेशन बहाल करने के लिए एक बहुराष्ट्रीय मिशन की कॉन्फ्रेंस बुलाने का फैसला किया
तेल बाजार नाकेबंदी की खबर के बाद कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंची

बातचीत क्यों नहीं बन पाई?

अमेरिका के उपराष्ट्रपति JD Vance ने बताया कि बातचीत इसलिए फेल हुई क्योंकि ईरान परमाणु हथियार न बनाने का पक्का वादा करने को तैयार नहीं था। अमेरिका की मांग थी कि ईरान यूरेनियम संवर्धन बंद करे और अपने स्टॉक को खत्म करे। वहीं ईरानी संसद के स्पीकर Mohammad Baqer Qalibaf ने कहा कि उन्हें वाशिंगटन के वादों पर भरोसा नहीं है।

Aanya

Aanya is Ex IndiaTV Journalist. She covers Expats oriented news, views and interviews With deep understanding of what Hindi Speaking people needs as updates in daily life to avoid fines, comply rules and stay updated.