अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा बयान देकर हलचल मचा दी है। उनका कहना है कि अमेरिका और ईरान एक परमाणु समझौते के बेहद करीब पहुंच चुके हैं। ट्रंप के मुताबिक, ईरान ने इस बात को स्वीकार कर लिया है कि वह भविष्य में कभी भी परमाणु हथियार नहीं रखेगा। हालांकि, दूसरी तरफ ईरान के विदेश मंत्री ने इस बातचीत में किसी भी तरह की बड़ी प्रगति से इनकार किया है, जिससे इस डील को लेकर सस्पेंस बना हुआ है।

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ट्रंप ने समझौते को लेकर क्या शर्तें रखी हैं?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक मीडिया इंटरव्यू में साफ किया कि वह एक बेहद मजबूत समझौता चाहते हैं। इस समझौते के तहत कुछ मुख्य बातें इस प्रकार हैं:

  • परमाणु सामग्री खरीदना भी प्रतिबंधित: नए समझौते में यह प्रावधान जोड़ा जाएगा कि ईरान न तो परमाणु हथियार बना सकेगा और न ही किसी दूसरे देश से इसे खरीद सकेगा।
  • प्रतिबंधों पर राहत तुरंत नहीं: ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि जब तक ईरान के व्यवहार में जमीनी बदलाव नहीं दिखेगा, तब तक उस पर लगे प्रतिबंध नहीं हटाए जाएंगे और न ही उसकी जब्त संपत्तियां लौटाई जाएंगी।
  • अमेरिकी उपकरणों से नष्ट होगा स्टॉक: समझौते के तहत अमेरिका के उपकरणों की मदद से ईरान की परमाणु सामग्री और बुनियादी ढांचे को नष्ट किया जाएगा।
  • सैन्य तैनाती रहेगी जारी: बातचीत पूरी होने तक अमेरिकी सेना इस क्षेत्र में तैनात रहेगी। समझौता न होने पर ट्रंप ने कड़ी सैन्य कार्रवाई की चेतावनी भी दी है।

ईरान का इस मामले पर क्या है रुख?

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची (Abbas Araghchi) ने ट्रंप के दावों के उलट बयान दिया है। उनका कहना है कि दोनों पक्षों के बीच संदेशों का आदान-प्रदान जरूर हो रहा है, लेकिन बातचीत में कोई खास प्रगति नहीं हुई है। ईरान ने अमेरिका पर बार-बार अपनी मांगें बदलने का आरोप लगाया है। ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई (Mojtaba Khamenei) का मानना है कि संवर्धित यूरेनियम (HEU) को देश से बाहर नहीं भेजा जाना चाहिए, क्योंकि इससे ईरान की सुरक्षा कमजोर हो सकती है। इसके अलावा, ईरान ने इस परमाणु समझौते को लेबनान में पूर्ण युद्धविराम से भी जोड़ दिया है।

क्षेत्र में बढ़ता तनाव और मध्यस्थों की भूमिका

इस पूरी बातचीत के पीछे पाकिस्तान दोनों देशों के बीच मध्यस्थ (mediator) के रूप में काम कर रहा है। यह कूटनीतिक प्रयास ऐसे समय में हो रहे हैं जब खाड़ी क्षेत्र में सैन्य तनाव काफी अधिक है। हाल ही में 6 जून 2026 को होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिकी और ईरानी सेनाओं के बीच आमने-सामने फायरिंग हुई थी। इसके साथ ही, अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) में अमेरिका एक प्रस्ताव लाया है, जिसके जरिए ईरान से उसके उन परमाणु ठिकानों की सटीक जानकारी मांगी जा रही है जो जून 2025 और 2026 की शुरुआत में नष्ट किए गए थे।

Frequently Asked Questions (FAQs)

क्या अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत सीधे हो रही है?

नहीं, दोनों देशों के बीच सीधे तौर पर बातचीत नहीं हो रही है। अमेरिका और ईरान के बीच संदेशों को पहुंचाने के लिए पाकिस्तान मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है।

ईरान पर लगे प्रतिबंधों को कब हटाया जाएगा?

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि प्रतिबंधों को तुरंत नहीं हटाया जाएगा। ईरान द्वारा अपने व्यवहार में बदलाव दिखाने के बाद ही प्रतिबंध हटाने और संपत्तियों को अनफ्रीज करने पर विचार होगा।