अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान के साथ चल रहे संघर्ष में अपनी जीत का दावा किया है। दोनों देशों के बीच एक समझौता (MoU) हुआ है जिससे चार महीने से चली आ रही जंग अब खत्म होगी। इस समझौते के बाद क्षेत्र में शांति और सुरक्षा आने की उम्मीद है।

Donald Trump ने सोशल मीडिया पर जानकारी दी कि अमेरिका ने अपने सभी लक्ष्य हासिल कर लिए हैं। उन्होंने कहा कि ईरान अब पूरी तरह कमजोर हो चुका है और वह परमाणु हथियार नहीं बना पाएगा क्योंकि इस पर कड़ी निगरानी रखी जाएगी। ट्रंप प्रशासन ने इस समझौते को ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति का हिस्सा बताया है।

अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance ने कन्फर्म किया कि अमेरिकी नौसेना ने ईरान के बंदरगाहों की नाकाबंदी हटा ली है। इससे Strait of Hormuz से तेल की आवाजाही फिर से बढ़ेगी। इस समझौते के तहत दोनों देशों के बीच लड़ाई खत्म होगी और अमेरिका ईरान पर लगे कुछ प्रतिबंधों में ढील देगा।

ईरान की प्रतिक्रिया इस पर अलग रही। ईरान के संसदीय स्पीकर Mohammad Bagher Ghalibaf ने इसे अमेरिका की हार और तेहरान की जीत बताया। वहीं ईरान की संसद के प्रवक्ता ने चेतावनी दी कि यह समझौता अंतिम नहीं है और देश को अपनी रक्षा के लिए तैयार रहना चाहिए।

इस समझौते के कुछ मुख्य बिंदु नीचे दिए गए हैं:

  • Strait of Hormuz को पूरी तरह फिर से खोला जाएगा।
  • ईरान परमाणु हथियार नहीं बनाएगा।
  • ईरान की 25 अरब डॉलर की जमी हुई संपत्ति वापस मिलेगी।
  • शांति समझौते के लिए 60 दिनों की बातचीत की अवधि तय की गई है।

इस पूरी प्रक्रिया में कतर (Qatar) ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई। हालांकि, स्विट्जरलैंड में होने वाली बातचीत को फिलहाल टाल दिया गया है। इसका कारण इसराइल और हिजबुल्लाह के बीच लेबनान में जारी लड़ाई को बताया गया है। ट्रंप ने इस मामले में हस्तक्षेप करते हुए इसराइल से युद्धविराम करने की अपील की थी।