अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान के साथ चल रहे टकराव में अपनी बड़ी जीत का दावा किया है. दोनों देशों के बीच एक समझौता (MOU) हुआ है जिससे करीब चार महीने से चल रही सैन्य कार्रवाई अब रुक गई है. इस समझौते को पाकिस्तान की मध्यस्थता से तय किया गया है और अब दोनों पक्ष बातचीत के जरिए विवाद सुलझाएंगे.
क्या है 14 पॉइंट्स वाला समझौता
इस समझौते पर 17 जून 2026 को साइन किए गए थे. व्हाइट हाउस ने कन्फर्म किया है कि यह नियम अब लागू हो चुके हैं. समझौते की मुख्य बातें इस प्रकार हैं:
- सैन्य अभियानों को तुरंत और हमेशा के लिए रोका जाएगा.
- दोनों देश एक-दूसरे की संप्रभुता का सम्मान करेंगे.
- अगले 60 दिनों तक दोनों देशों के बीच बातचीत चलेगी.
- Strait of Hormuz को दोबारा खोला जाएगा.
- 30 दिनों के भीतर ईरान के जहाजों पर लगी अमेरिकी नाकाबंदी हटा ली जाएगी.
- ईरान को तेल निर्यात करने की विशेष छूट दी जाएगी.
ट्रंप और अमेरिकी अधिकारियों का पक्ष
Donald Trump ने इसे एक ऐतिहासिक सफलता बताया है. उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा कि ईरान अब पूरी तरह खत्म हो चुका है और उसे कोई पैसा नहीं मिलेगा. ट्रंप का कहना है कि अमेरिकी ताकत की वजह से ईरान की सैन्य क्षमताएं तबाह हो गई हैं. हालांकि, उन्होंने यह चेतावनी भी दी है कि अगर 60 दिनों के अंदर अंतिम समझौता नहीं हुआ, तो अमेरिका दोबारा बमबारी शुरू कर देगा. वहीं, उपराष्ट्रपति JD Vance ने साफ किया कि अमेरिका ईरान को कोई अग्रिम वित्तीय लाभ नहीं दे रहा है.
ईरान और अन्य देशों की प्रतिक्रिया
ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian और मुख्य वार्ताकार Mohammad Bagher Ghalibaf ने इस समझौते को तेहरान की जीत बताया है. Hezbollah के चीफ Naim Qassem ने भी इसे एक बड़ी जीत कहा है. ईरानी दावों के मुताबिक, इस डील से उनके करीब 24 अरब डॉलर के फ्रीज किए गए पैसे वापस मिल सकते हैं और पुनर्निर्माण के लिए 300 अरब डॉलर मिल सकते हैं, लेकिन अमेरिकी अधिकारी इन बातों से इनकार कर रहे हैं.
विशेषज्ञों की राय और ताजा अपडेट
इस डील को लेकर जानकारों की राय बंटी हुई है. पूर्व अमेरिकी सहायक सचिव David Schenker ने चिंता जताई है कि यह समझौता ईरान के लिए बड़ी जीत है और इससे क्षेत्र में उसका प्रभाव बढ़ेगा. वहीं Max Boot का मानना है कि ईरान को बिना किसी ठोस परमाणु रियायत के बड़ा आर्थिक फायदा मिला है.
पिछले 24 से 48 घंटों की बात करें तो स्विट्जरलैंड में होने वाली एक अहम बैठक रद्द कर दी गई है. व्हाइट हाउस ने इसके लिए लॉजिस्टिक्स की वजह बताई है, लेकिन कुछ राजनयिकों का कहना है कि लेबनान में इसराइल के हमलों की वजह से यह बैठक नहीं हो पाई. इस पूरे मामले में इसराइल ने अपनी नाराजगी जताई है क्योंकि उससे इस डील के बारे में सलाह नहीं ली गई थी.