अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने शुक्रवार को संकेत दिया है कि ईरान के खिलाफ चल रहा अमेरिकी सैन्य अभियान जल्द ही खत्म हो सकता है। 21 मार्च 2026 को सोशल मीडिया पर जारी एक बयान में ट्रम्प ने कहा कि अमेरिका अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के बहुत करीब है और अब मिडिल ईस्ट में सैन्य प्रयासों को कम करने पर विचार किया जा रहा है। 28 फरवरी से शुरू हुए Operation Epic Fury के तहत अब तक हज़ारों ईरानी ठिकानों को निशाना बनाया जा चुका है।

Operation Epic Fury के प्रमुख लक्ष्य क्या थे और अब तक क्या हुआ?

व्हाइट हाउस और अमेरिकी रक्षा विभाग के अनुसार, इस सैन्य कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य ईरान की मिसाइल क्षमता और उत्पादन केंद्रों को पूरी तरह नष्ट करना था। इसके अलावा ईरान की नौसेना, वायु सेना और वायु रक्षा प्रणालियों को भी भारी नुकसान पहुँचाया गया है। पेंटागन के अनुसार, मिशन का मकसद यह सुनिश्चित करना था कि ईरान कभी भी परमाणु हथियार हासिल न कर सके। व्हाइट हाउस प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने बताया कि राष्ट्रपति ने ज़मीनी सेना भेजने का कोई फैसला नहीं लिया है और इस मिशन को 4 से 6 हफ्तों के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था।

मिडिल ईस्ट के देशों और प्रवासियों पर इस संघर्ष का क्या असर हुआ?

इस सैन्य तनाव का असर पूरे क्षेत्र पर देखा जा रहा है। ईरान ने संयुक्त अरब अमीरात (UAE) को चेतावनी दी है कि वह अपनी ज़मीन का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ न होने दे। वहीं सऊदी अरब ने अपने पूर्वी क्षेत्र में 20 ईरानी ड्रोन मार गिराए हैं। इस संघर्ष के कारण बड़ी संख्या में लोग विस्थापित हुए हैं और तेल की वैश्विक आपूर्ति पर भी संकट मंडरा रहा है। स्थिति को संभालने के लिए अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने ईरानी तेल पर लगे प्रतिबंधों में 19 अप्रैल तक के लिए कुछ ढील दी है ताकि बाजार में तेल की कमी न हो।

युद्ध से जुड़ी अब तक की बड़ी जानकारी

विवरण महत्वपूर्ण आंकड़े और जानकारी
ईरान में जनहानि 1,300 से अधिक लोगों की मौत
लेबनान में प्रभाव 1,000 से अधिक मौतें और लाखों विस्थापित
अमेरिकी सैन्य नुकसान 13 सैनिकों की जान गई
ऑपरेशन की शुरुआत 28 फरवरी 2026
तेल प्रतिबंधों में छूट 21 मार्च से 19 अप्रैल 2026 तक
साउदी अरब की कार्रवाई 20 ड्रोन इंटरसेप्ट किए गए