अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump और ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने मिडिल ईस्ट में युद्ध खत्म करने के लिए एक अहम समझौते पर दस्तखत किए हैं. इस डील से Strait of Hormuz को फिर से खोलने का रास्ता साफ हो गया है. ट्रंप ने इस समझौते का विरोध करने वालों को बेवकूफ और जलनखोर बताया है.

ट्रंप ने आलोचकों को दिया जवाब

राष्ट्रपति ट्रंप ने फ्रांस के Évian-les-Bains में हुए G7 शिखर सम्मेलन के दौरान यह बात कही. उन्होंने कहा कि जो लोग इस डील का विरोध कर रहे हैं, वे या तो जलने वाले हैं, बुरे लोग हैं या फिर बेवकूफ हैं. ट्रंप का तर्क है कि यह समझौता ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकेगा. हालांकि, उन्होंने यह चेतावनी भी दी कि अगर ईरान ने अपनी प्रतिबद्धताओं को तोड़ा, तो अमेरिका फिर से बमबारी शुरू कर सकता है.

क्या है 14 पॉइंट का समझौता

अमेरिका और ईरान के बीच एक 14 पॉइंट का समझौता (MoU) हुआ है जिसे अब लागू कर दिया गया है. इस समझौते की मुख्य बातें नीचे दी गई हैं:

  • सैन्य अभियान बंद: लेबनान सहित सभी मोर्चों पर सैन्य ऑपरेशन तुरंत और स्थायी रूप से बंद होंगे.
  • परमाणु पाबंदी: ईरान अपने परमाणु भंडार को कम करेगा जिसकी निगरानी UN की एजेंसी IAEA करेगी.
  • तेल प्रतिबंध: अमेरिका ईरान पर लगे तेल प्रतिबंधों को तुरंत हटाएगा.
  • रिकंस्ट्रक्शन फंड: परमाणु कार्यक्रम पर अंतिम सहमति बनने के बाद अमेरिका 300 अरब डॉलर का फंड जारी करेगा.
  • समुद्री रास्ता: Strait of Hormuz को अंतरराष्ट्रीय ट्रैफिक के लिए फिर से खोला जाएगा.

जेनेवा में होगा औपचारिक कार्यक्रम

इस समझौते की औपचारिक साइनिंग 19 जून 2026 को स्विट्जरलैंड के Geneva में होगी. इस कार्यक्रम में अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance के शामिल होने की उम्मीद है. इसके बाद अगले 60 दिनों तक प्रतिबंधों और परमाणु कार्यक्रम पर विस्तार से बातचीत होगी. ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने संकेत दिया है कि अंतिम समझौते के लिए बातचीत शुक्रवार से शुरू हो सकती है.

पाकिस्तान और कतर की बड़ी भूमिका

इस मुश्किल समझौते को संभव बनाने में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif और कतर ने मध्यस्थ के तौर पर अहम भूमिका निभाई है. इन दोनों देशों की कोशिशों से अमेरिका और ईरान के बीच यह रास्ता खुला है.

विरोध और असर

इस डील का अमेरिका के भीतर काफी विरोध हो रहा है. रिपब्लिकन पार्टी के कई नेताओं ने इसे गलत बताया है. Senator Bill Cassidy ने इसे दशकों की सबसे बड़ी विदेश नीति की गलती कहा है. वहीं, इसराइल में भी इस डील को लेकर समर्थन कम है और वहां लेबनान में छोटे हमले अब भी जारी हैं.

इस समझौते की खबर आते ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में गिरावट आई है और शेयर बाजार में तेजी देखी गई है, क्योंकि दुनिया को अब युद्ध खत्म होने की उम्मीद है.

Nura Basta

Nura Basta is the Editor at GulfHindi.com and a journalism graduate from IIMC Delhi. With more than 7 years of professional experience, he has worked with leading media organizations including Aaj Tak (2018–2021) and Gulf News (2021–2025). His reporting and editorial work primarily focus on Gulf news, current affairs, and issues relevant to the Indian diaspora. At GulfHindi.com, he is committed to providing credible, well-researched, and impactful content for Hindi readers in the Gulf.