अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के पुनर्निर्माण के लिए 300 अरब डॉलर देने की खबरों को पूरी तरह गलत बताया है। उन्होंने साफ कहा कि अमेरिका इस काम के लिए एक पैसा भी खर्च नहीं कर रहा है। इस खबर को लेकर अब अमेरिका और खाड़ी देशों के बीच अलग-अलग बातें सामने आ रही हैं।

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राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने 18 जून 2026 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर इन खबरों को “फेक न्यूज” और “प्रोपगेंडा” करार दिया। उन्होंने G7 समिट के दौरान भी जोर देकर कहा कि अमेरिका इस फंड में निवेश नहीं कर रहा है और न ही एक सेंट भी दे रहा है।

फंड कहां से आएगा

वहीं, अमेरिका के उपराष्ट्रपति JD Vance ने इस मामले में थोड़ी अलग जानकारी दी। उन्होंने कहा कि 300 अरब डॉलर का यह पुनर्निर्माण फंड मौजूद तो है, लेकिन यह अमेरिकी टैक्सपेयर्स के पैसों से नहीं आएगा। यह पैसा Gulf Coast Coalition (खाड़ी देशों के समूह) की तरफ से दिया जाएगा। उन्होंने यह भी साफ किया कि ईरान को यह पैसा तभी मिलेगा जब वह शांति समझौते की सभी शर्तों को पूरी तरह मानेगा।

समझौते की मुख्य बातें

  • एक समझौता (MoU) हुआ है जिसके तहत अमेरिका और उसके क्षेत्रीय साथी मिलकर ईरान के आर्थिक विकास के लिए कम से कम 300 अरब डॉलर की योजना बनाएंगे।
  • इस योजना को अंतिम रूप देने के लिए 60 दिनों का समय तय किया गया है।
  • अंतिम शांति समझौते पर 21 जून 2026 को हस्ताक्षर होने की उम्मीद है।
  • इस फंड का आधा हिस्सा निजी कंपनियों ने देने का वादा किया है।
  • ईरान को अपना परमाणु कार्यक्रम खत्म करना होगा और सख्त जांच नियमों को मानना होगा।

अन्य देशों और नेताओं की प्रतिक्रिया

सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान ने अल अरबिया को बताया कि उनके पास इस फंड की कोई विस्तृत जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि निवेश से पहले ईरान के साथ भरोसा बनाना ज्यादा जरूरी है। दूसरी तरफ, अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने इस फंड की कड़ी आलोचना की और इसे गलत बताया।

इस बीच, इजराइल ने इस प्रस्तावित फंड पर चिंता जताई है और अपनी सेना को स्वतंत्र कार्रवाई के लिए तैयार रहने को कहा है। वहीं, इस पूरे समझौते को करवाने में पाकिस्तान और कतर ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई है, जिसमें कतर ने सबसे ज्यादा मेहनत की है। राष्ट्रपति ट्रम्प ने यह चेतावनी भी दी है कि अगर ईरान ने समझौते की शर्तों का उल्लंघन किया तो अमेरिका फिर से बमबारी शुरू कर देगा।