अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव को खत्म करने के लिए एक समझौता हुआ है, लेकिन इस बीच डोनाल्ड ट्रंप ने यूरोपीय देशों के रुख पर अपनी नाराजगी जताई है। ट्रंप ने खास तौर पर ब्रिटेन, इटली, फ्रांस और जर्मनी के तरीके पर सवाल उठाए हैं। यह मामला अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है।

पूरा मामला यह है कि 14 और 15 जून 2026 को ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी और इटली ने ईरान पर लगे प्रतिबंध हटाने की तैयारी की थी। यह फैसला वॉशिंगटन और तेहरान के बीच युद्ध खत्म करने और परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत करने के बाद लिया गया था। इन चारों देशों ने इस समझौते का स्वागत किया और कहा कि ईरान को कभी परमाणु हथियार नहीं मिलने चाहिए।

वहीं 24 जून 2026 को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बयान दिया कि युद्ध सही दिशा में जा रहा है और ईरान काफी बड़े समझौते कर रहा है। यह बात स्विट्जरलैंड में हुई बातचीत और 14 पॉइंट्स के एक मेमोरेंडम साइन होने के बाद सामने आई। ट्रंप ने यह भी जानकारी दी कि ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में जहाजों से टोल टैक्स न लेने की बात कही है, लेकिन उन्होंने चेतावनी दी कि अगर यह जानकारी गलत निकली तो बातचीत बंद कर दी जाएगी।

यूरोपीय देशों का बचाव

ट्रंप की नाराजगी के बीच नाटो (NATO) के महासचिव मार्क रुट्टे ने यूरोपीय देशों की सैन्य मदद का बचाव किया। उन्होंने बताया कि यूरोपीय बेस से 4,000 से 5,000 उड़ानें (sorties) भरी गईं और इटली के बेस से 500 अमेरिकी विमानों ने ऑपरेशन में मदद की। रुट्टे ने कहा कि वह ट्रंप की निराशा को समझते हैं, लेकिन यूरोप ने इस ऑपरेशन में बहुत बड़ा योगदान दिया है।

परमाणु जांच और विवाद

इस डील को लेकर कुछ बातों पर विवाद भी दिख रहा है। ट्रंप का दावा है कि ईरान सबसे ऊंचे स्तर की परमाणु जांच के लिए मान गया है, लेकिन ईरान ने इस बात से इनकार किया है। दूसरी तरफ ईरान के संसद स्पीकर मोहम्मद बागेर गालिबाफ ने इस समझौते को अमेरिका की हार बताया है।

खाड़ी देशों के लिए यह खबर इसलिए जरूरी है क्योंकि अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो फिलहाल इस क्षेत्र के दौरे पर हैं। वह वहां के देशों को भरोसा दिला रहे हैं कि ईरान के साथ किसी भी बातचीत में अमेरिका उनके हितों का पूरा ख्याल रखेगा।