अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत को लेकर राष्ट्रपति Donald Trump काफी भरोसा जता रहे हैं। Trump का कहना है कि ईरान के साथ बातचीत बहुत सही दिशा में जा रही है और उन्होंने चल रहे क्षेत्रीय तनाव को केवल एक “प्रैक्टिस” बताया है। लेकिन दूसरी तरफ जमीनी हालात बिल्कुल अलग नजर आ रहे हैं। ईरान ने कुवैत और बहरीन की तरफ मिसाइलें दागी हैं और अमेरिका ने ईरान के गैस स्मगलिंग नेटवर्क पर नए प्रतिबंध लगा दिए हैं। खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीय प्रवासियों के लिए सुरक्षा और हवाई यात्रा को लेकर चिंता बढ़ गई है क्योंकि तनाव सीधे तौर पर उड़ानों और काम-काज को प्रभावित कर रहा है।

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आखिर बातचीत में क्यों बना हुआ है गतिरोध?

ईरान के सुप्रीम लीडर के सैन्य सलाहकार Mohsen Rezaei ने साफ कहा है कि अमेरिका के साथ बातचीत में गतिरोध (deadlock) बना हुआ है। ईरान का कहना है कि जब तक अमेरिका उसके जब्त किए गए 24 बिलियन डॉलर (करीब 24 अरब डॉलर) के फंड को रिलीज नहीं करता, तब तक कोई समझौता नहीं हो सकता। ईरान के उप विदेश मंत्री Kazem Gharibabadi ने मांग रखी है कि समझौते के तहत कम से कम 50 प्रतिशत फंड तुरंत जारी किया जाए और बाकी पैसा एक से दो महीने के भीतर मिले। वहीं अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio का कहना है कि ईरान को प्रतिबंधों में कोई जल्दबाजी में छूट नहीं दी जाएगी, भले ही वे परमाणु मुद्दों पर बातचीत के लिए तैयार हुए हों।

कुवैत और बहरीन पर मिसाइल हमला और प्रवासियों पर असर

खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा हालात बहुत तेजी से बदले हैं जिससे वहां काम करने वाले प्रवासियों में डर का माहौल है। सैन्य अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार:

  • मिसाइल और ड्रोन हमले: US Central Command (CENTCOM) के मुताबिक, शुक्रवार रात ईरान ने कुवैत और बहरीन की तरफ 7 बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं, जिनमें से 6 को हवा में ही मार गिराया गया।
  • एयरपोर्ट पर हमला: इससे पहले कुवैत इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर हुए हमले में एक व्यक्ति की मौत हो गई थी और उड़ानें रोकनी पड़ी थीं। इससे भारत और अन्य देशों से यात्रा करने वाले प्रवासियों को काफी परेशानी उठानी पड़ी।
  • जवाबी कार्रवाई: अमेरिकी सेना ने Strait of Hormuz के पास ईरान के 4 ड्रोन मार गिराए और उसके तटीय रडार स्टेशनों पर हमला किया। विदेश मंत्री Rubio के मुताबिक, ईरान ने Strait of Hormuz के बड़े हिस्से में बारूदी सुरंगें (mines) बिछा दी हैं।

ईरान के गैस स्मगलिंग ‘शैडो नेटवर्क’ पर अमेरिका का बड़ा एक्शन

तनाव के बीच अमेरिका के ट्रेजरी विभाग ने ईरान के अवैध लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) स्मगलिंग नेटवर्क पर कड़े प्रतिबंध लगाए हैं। यह नेटवर्क ओमान का फर्जी नाम इस्तेमाल करके एशिया के देशों में गैस भेज रहा था। अमेरिकी प्रतिबंधों की जद में Butani Trading LLC, Dundlod Trading FZE और ADH Energy FZE जैसी कंपनियां आई हैं। इसके अलावा ईरान के एक्सचेंज हाउस ‘Mehrdad Geramian Nik and Partners’ पर भी कार्रवाई की गई है जो प्रतिबंधित ईरानी बैंकों के लिए विदेशी मुद्रा का लेन-देन संभाल रहा था। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि वे ईरान के आर्थिक रास्ते बंद करने के लिए ऑपरेशन इकोनॉमिक फ्यूरी (Operation Economic Fury) जारी रखेंगे।

Frequently Asked Questions (FAQs)

क्या कुवैत और बहरीन के हमलों से उड़ानों पर कोई असर पड़ा है?

हां, कुवैत इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर हुए हमले के बाद वहां उड़ानें कुछ समय के लिए निलंबित कर दी गई थीं और हवाई क्षेत्र में सुरक्षा अलर्ट जारी किया गया है, जिससे प्रवासियों की यात्रा प्रभावित हुई है।

अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत रुकने की मुख्य वजह क्या है?

मुख्य वजह ईरान के जब्त किए गए 24 बिलियन डॉलर के फंड हैं। ईरान तुरंत 50% रकम की रिहाई चाहता है, जबकि अमेरिका बिना परमाणु शर्तों के प्रतिबंधों में ढील देने को तैयार नहीं है।