अमेरिका का ईरान पर बड़ा आर्थिक युद्ध, राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा सैन्य विकल्प अभी भी खुला है।

अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने 21 अगस्त 2026 को यह साफ कर दिया कि ईरान के खिलाफ चल रही आर्थिक घेराबंदी और पाबंदियां किसी भी तरह से सैन्य ताकत के इस्तेमाल को कम नहीं करती हैं। अमेरिकी प्रशासन ने यह चेतावनी दी है कि ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकने के लिए अमेरिका के पास सभी सैन्य विकल्प अभी भी पूरी तरह से खुले हुए हैं। अमेरिका का यह भी दावा है कि उसने पहले ही ईरान की नौसेना और वायु सेना को कमजोर कर दिया है और उसकी मिसाइल तथा ड्रोन बनाने की क्षमताओं को भारी नुकसान पहुंचाया है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान को मध्य पूर्व क्षेत्र का एक दबंग देश बताया और यह भी घोषणा की कि रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण Strait of Hormuz पर पूरी तरह से अमेरिका का नियंत्रण बना हुआ है।
कड़े वित्तीय प्रतिबंधों का ऐलान और ओमान की कूटनीति
अमेरिकी ट्रेजरी सचिव Scott Bessent ने यह घोषणा की कि संयुक्त राज्य अमेरिका ईरान पर इतिहास के सबसे कड़े वित्तीय प्रतिबंध लगाने जा रहा है। इन नए और कड़े प्रतिबंधों की पूरी जानकारी आगामी सोमवार, 24 अगस्त 2026 को सार्वजनिक की जाएगी। अमेरिकी अधिकारियों ने चीन से भी यह अपील की है कि वह ऊर्जा की कीमतों को स्थिर रखने और स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज को फिर से खोलने के लिए अमेरिका के इस आर्थिक दबाव अभियान का समर्थन करे। अमेरिका का यह भी कहना है कि इन नए उपायों से तेल की कीमतों में अचानक कोई भारी उछाल नहीं आना चाहिए। इस बीच, अमेरिका के उपराष्ट्रपति JD Vance ने यह बात रखी कि तेहरान का सामना करने के लिए आर्थिक दबाव ही उनका मुख्य हथियार है, लेकिन यदि ईरान किसी भी परमाणु समझौते को मानने से इनकार करता है, तो बाकी सभी रास्ते भी खुले रहेंगे। कूटनीतिक स्तर पर ओमान और ईरान के विदेश मंत्रियों ने भी बातचीत के नए रास्तों को फिर से शुरू करने के लिए आपस में चर्चा की है, जबकि नाटो के सदस्य देश इस बात पर ज्यादा जोर दे रहे हैं कि स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज को जल्द से जल्द खोला जाए ताकि इस सीधे टकराव से बचा जा सके।
तेहरान की प्रतिक्रिया और क्षेत्रीय परिवहन पर असर
ईरान की राजधानी तेहरान में राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने देश के भीतर की राजनीतिक और प्रशासनिक दूरियों को स्वीकार किया और यह बात रखी कि इस संघर्ष को ताकत और सम्मान के साथ समाप्त किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि अमेरिका के साथ जो समझौता ज्ञापन तैयार हुआ है, उसमें समर्पण जैसी कोई भी शर्त शामिल नहीं है। इसके साथ ही, ईरानी सशस्त्र बलों के चीफ ऑफ स्टाफ मेजर जनरल Ali Abdollahi ने चेतावनी दी कि यदि अमेरिका की तरफ से कोई भी नई धमकी दी जाती है, तो उसका बहुत कड़ा और दूरगामी जवाब दिया जाएगा। ईरान की संसद के अध्यक्ष Mohammad Bagher Ghalibaf का यह सुझाव था कि वाशिंगटन को यह समझ आ चुका है कि वह सीधे सैन्य टकराव में जीत हासिल नहीं कर सकता है। ईरानी नौसेना के कमांडर Shahram Irani ने कहा कि उनके देश के सुरक्षा बल रणनीतिक जलमार्गों में अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा लगातार कर रहे हैं। इस पूरे तनाव का असर क्षेत्रीय परिवहन पर बहुत ज्यादा पड़ा है और 20 अगस्त 2026 तक केवल सात कार्गो जहाज ही स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज से गुजर सके, जो कि इस संघर्ष से पहले रोजाना आने-जाने वाले 130 से ज्यादा जहाजों की तुलना में बहुत भारी गिरावट को दिखाता है। राजनीतिक विश्लेषकों और अखबारों के जानकारों ने यह आशंका भी जताई है कि आने वाले अमेरिकी मध्यावधि चुनावों से पहले ट्रंप प्रशासन पर राजनीतिक दबाव बढ़ाने के लिए ईरान सऊदी अरब या कतर में ऊर्जा के बुनियादी ढांचों को निशाना बना सकता है।