अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान के साथ युद्ध विराम (ceasefire) की समय सीमा को अनिश्चित काल के लिए बढ़ा दिया है. हालांकि, उन्होंने ईरान के बंदरगाहों की नाकेबंदी जारी रखी है. ट्रंप ने ईरान से अपील की है कि वह समझदारी दिखाते हुए जल्द ही कोई डील कर ले ताकि हालात सुधर सकें. इस बीच ईरान ने अमेरिका के इस कदम की कड़ी निंदा की है और इसे नियमों का उल्लंघन बताया है.

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ट्रंप ने युद्ध विराम क्यों बढ़ाया और नाकेबंदी क्यों जारी रखी?

President Trump ने पाकिस्तान की रिक्वेस्ट पर युद्ध विराम को आगे बढ़ाया है ताकि ईरान एक ठोस प्रस्ताव तैयार कर सके. लेकिन अमेरिका ने ईरान के पोर्ट्स की नाकेबंदी नहीं हटाई है. ट्रंप का कहना है कि ईरान को अपनी स्थिति सुधारने के लिए कॉमन सेंस और समझदारी का इस्तेमाल करना होगा. अमेरिकी सैन्य बल अभी भी पूरी तरह तैयार हैं और पोर्ट्स पर नजर रखे हुए हैं.

अमेरिका की ईरान से क्या मुख्य मांगें हैं?

व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव Karoline Leavitt ने साफ किया है कि बातचीत सिर्फ परमाणु मुद्दों (Nuclear File) पर होगी. अमेरिका की शर्तें बहुत सख्त हैं, जिसमें ईरान को परमाणु बम नहीं बनाना होगा और अपना समृद्ध यूरेनियम (enriched uranium) सौंपना होगा. मानवीय मुद्दों पर फिलहाल कोई बात नहीं हो रही है. व्हाइट हाउस का मानना है कि ईरान के अंदर अभी नरम दल और कट्टरपंथियों के बीच खींचतान चल रही है.

ईरान की प्रतिक्रिया और अन्य देशों की भूमिका क्या है?

ईरान के संसद स्पीकर Mohammad Baqer Qalibaf ने पोर्ट ब्लॉक को युद्ध विराम का उल्लंघन बताया है. ईरान के विदेश मंत्रालय ने अमेरिका पर अविश्वास जताते हुए कहा कि वह बातचीत में शामिल होगा या नहीं, इस पर अभी फैसला नहीं लिया है. इस बीच पाकिस्तान, मिस्र और तुर्की ने इस्लामाबाद अकॉर्ड नाम का एक प्रस्ताव दिया है ताकि विवाद खत्म हो और Strait of Hormuz को फिर से खोला जा सके. रूस ने भी दोनों देशों से बातचीत जारी रखने की अपील की है.

Praggya Singh sabal

Journalist from Noida. Covering Delhi, NCR and National Updates.