अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ चल रहे सैन्य संघर्ष में मारे गए 13 अमेरिकी सैनिकों को श्रद्धांजलि दी है। मेमोरियल डे के अवसर पर अर्लिंग्टन नेशनल सिमेट्री में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान ट्रंप ने इन वीर सैनिकों के बलिदान को याद किया। इस मौके पर ट्रंप ने ईरान को लेकर एक बड़ा बयान दिया और चेतावनी दी कि अगर उसने शांति समझौते पर हस्ताक्षर नहीं किए, तो अमेरिका पहले से भी ज्यादा बड़ा हमला करने के लिए तैयार है।
ईरान युद्ध और ऑपरेशन एपिक फ्यूरी क्या है?
अमेरिका और ईरान के बीच यह सैन्य संघर्ष फरवरी 2026 के आखिरी दिनों में शुरू हुआ था, जिसे अमेरिका ने ऑपरेशन एपिक फ्यूरी (Operation Epic Fury) का नाम दिया है। मार्च 2026 के मध्य तक इस संघर्ष में 13 अमेरिकी सैनिक अपनी जान गंवा चुके थे, जिसमें इराक में ईंधन भरने वाले विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने से मारे गए छह चालक दल के सदस्य भी शामिल हैं। इस पूरे सैन्य अभियान के कारण अब तक कम से कम 29 अरब डॉलर का खर्च आ चुका है और इसके कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार भी काफी प्रभावित हुआ है।
डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर क्या चेतावनी दी?
मेमोरियल डे कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि इन 13 सैनिकों ने अपना जीवन इसलिए न्यौछावर किया ताकि दुनिया में आतंकवाद को बढ़ावा देने वाला देश कभी भी परमाणु हथियार हासिल न कर सके। उन्होंने आगे कहा कि व्हाइट हाउस ईरान के साथ शांति समझौता करने के बहुत करीब है। ट्रंप ने स्पष्ट चेतावनी दी कि अगर ईरान ने राष्ट्रपति के रूप में उनके साथ समझौता नहीं किया, तो जंग को और भी बड़े और मजबूत स्तर पर ले जाया जाएगा।
ईरान का इस पूरे मामले पर क्या रुख है?
अमेरिका की इस कड़ी चेतावनी के बीच ईरान ने भी झुकने से इनकार कर दिया है। ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव ने सोमवार को एक बयान जारी कर कहा कि वे किसी भी सूरत में आत्मसमर्पण नहीं करेंगे और न ही पीछे हटेंगे। इस समारोह में राष्ट्रपति ट्रंप के साथ अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस (JD Vance) और रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ (Pete Hegseth) भी शामिल रहे, जिन्होंने सैनिकों के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं।
Frequently Asked Questions (FAQs)
ऑपरेशन एपिक फ्यूरी क्या है?
यह अमेरिका द्वारा ईरान के खिलाफ चलाया जा रहा एक सैन्य अभियान है जो फरवरी 2026 में शुरू हुआ था। इस अभियान में अब तक 13 अमेरिकी सैनिकों की मौत हो चुकी है।
इस युद्ध के कारण वैश्विक स्तर पर क्या प्रभाव पड़ा है?
इस संघर्ष के कारण अब तक लगभग 29 अरब डॉलर का नुकसान हुआ है और वैश्विक ऊर्जा बाजारों में अस्थिरता पैदा हुई है।