Strait of Hormuz पर अमेरिका के बयान से मचा हड़कंप, ईरान ने दी कड़ी चेतावनी और ओमान के साथ शुरू की नई बातचीत।

अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने शुक्रवार को एक ऐसा बयान दिया जिससे खाड़ी देशों में तनाव बहुत ज्यादा बढ़ गया। उन्होंने कहा कि ईरान की हार के बाद वह जल्द ही होर्मुज जलडमरूमध्य को अमेरिकी क्षेत्र घोषित कर देंगे। इस बयान के आने के बाद इलाके में खलबली मच गई और चारों तरफ इसकी चर्चा होने लगी। हालांकि बाद में व्हाइट हाउस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने सफाई देते हुए कहा कि राष्ट्रपति सिर्फ मजाक कर रहे थे और उन्होंने इस बारे में अपने सलाहकारों से कोई बात नहीं की थी। लेकिन इस सफाई के बाद भी ईरानी नेताओं का गुस्सा शांत नहीं हुआ और उन्होंने अमेरिका को दो टूक जवाब दे दिया।
ईरान का कड़ा रुख और क्षेत्रीय तनाव
ईरान के उप विदेश मंत्री Kazem Gharibabadi ने कड़े शब्दों में कहा कि यह जलडमरूमध्य हमेशा से ईरान का रहा है, आज भी ईरान का है और आगे भी ईरान का ही रहेगा। वहीं दूसरी तरफ इस महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते पर सुरक्षा की स्थिति बेहद नाजुक बनी हुई है क्योंकि अमेरिका और ईरान के बीच टकराव लगातार गहराता जा रहा है। शुक्रवार की शाम को होर्मुज जलडमरूमध्य में एक ADNOC पोत पर हमला कर दिया गया। एक हफ्ते के भीतर इस इलाके में इस तरह की यह तीसरी घटना है जिससे समुद्री व्यापार से जुड़े लोग और नौकायन करने वाले बहुत ज्यादा डरे हुए हैं।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड की रिपोर्ट के अनुसार नौसेना की नाकाबंदी लागू करने के दौरान अमेरिकी बलों ने अब तक 62 कमर्शियल जहाजों का रास्ता बदला है और तीन जहाजों को निष्क्रिय कर दिया है। इस भारी उथल-पुथल के बीच ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने इस बात की पुष्टि की है कि वाशिंगटन के साथ बातचीत अभी पूरी तरह रुकी हुई है। इसके बावजूद तेहरान इस जलडमरूमध्य से सुरक्षित समुद्री रास्ते निकालने के लिए ओमान के साथ अलग से बातचीत कर रहा है ताकि व्यापार सुचारू रूप से चलता रहे।
अंतरराष्ट्रीय कानून और कानूनी चेतावनी
अंतरराष्ट्रीय कानून के जानकारों ने चेतावनी दी है कि अमेरिका द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपना अधिकार जताना या वहां टैक्स वसूलने की कोशिश करना सीधे तौर पर अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन होगा। ईरान के न्यायपालिका प्रमुख Gholamhossein Mohseni-Ejei ने भी देश के समुद्री अधिकारों की पूरी ताकत से रक्षा करने के संकल्प को दोहराया है। इस पूरे घटनाक्रम के बाद से क्षेत्रीय पर्यवेक्षक वैश्विक शिपिंग में लगातार आ रही बाधाओं और इस मौजूदा गतिरोध का कोई कूटनीतिक हल न निकलने को लेकर खासे चिंतित नजर आ रहे हैं।