अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने एक बहुत बड़ी खबर साझा की है। उन्होंने दावा किया है कि ईरान के साथ समझौता लगभग पूरा हो चुका है, जिसके बाद उन्होंने ईरान पर होने वाले बम हमलों और स्ट्राइक्स को फिलहाल के लिए रद्द कर दिया है। लेकिन इस खबर के बाद दुनिया में हलचल मच गई है क्योंकि ईरान और इसराइल दोनों ने ही इस समझौते की बात को मानने से साफ इनकार कर दिया है।
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Donald Trump ने क्या कहा
राष्ट्रपति Trump ने 11 जून 2026 को बताया कि अमेरिका, इसराइल, सऊदी अरब, UAE, कतर, तुर्की, पाकिस्तान, बहरीन, कुवैत, जॉर्डन और मिस्र जैसे देशों की सहमति से एक डील तय हुई है। Trump के मुताबिक यह समझौता बुनियादी बातों और बारीकियों, दोनों पर मंजूर हो गया है। हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि जब तक कागजों पर साइन नहीं हो जाते, तब तक समुद्री नाकाबंदी (naval blockade) जारी रहेगी।
ईरान और इसराइल की प्रतिक्रिया
जहाँ एक तरफ अमेरिका खुश था, वहीं दूसरी तरफ ईरान की सरकारी एजेंसियों Tasnim और Fars ने Trump के दावे को गलत बताया। ईरान का कहना है कि उन्होंने अभी तक किसी भी समझौते या मेमोरेंडम पर साइन नहीं किए हैं और लोगों को ऐसी खबरों पर यकीन नहीं करना चाहिए। इसी तरह, इसराइल के एक बड़े अधिकारी ने भी Channel 12 को बताया कि इसराइल इस समझौते को नहीं मानता है।
ईरान के UN प्रतिनिधि Amir Saeid Iravani ने कहा कि धमकियों और जबरदस्ती के दम पर कोई भी स्थायी समझौता नहीं हो सकता। साथ ही ईरान की सेना Khatam al-Anbiya ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका ने हमला किया तो इसका जवाब और भी खतरनाक होगा।
समझौते में किन बातों पर चर्चा हुई
खबरों के मुताबिक, 10 जून की रात को अमेरिका और ईरान के बीच लंबी बातचीत चली। कतर के दूत Ali Al-Thawadi और ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने मुख्य रूप से तीन मुद्दों पर बात की:
- ईरान की जमी हुई संपत्ति (frozen assets) को वापस कैसे लौटाया जाए।
- 60 दिनों के युद्धविराम के दौरान Hormuz जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोलने का इंतजाम।
- ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर आगे बातचीत कैसे होगी।
सूत्रों का कहना है कि सिद्धांतों पर तो बात बन गई है, लेकिन ईरान के सुप्रीम लीडर Mojtaba Khamenei की आखिरी मंजूरी अभी बाकी है।
युद्ध का पिछला घटनाक्रम
यह पूरी बातचीत 2026 के ईरान युद्ध के बीच हो रही है, जो 28 फरवरी 2026 को शुरू हुआ था। इससे पहले 9 और 10 जून को अमेरिका ने दक्षिणी ईरान में हमले किए थे क्योंकि एक अमेरिकी हेलीकॉप्टर को मार गिराया गया था। 10 जून को ही IAEA बोर्ड में फ्रांस, जर्मनी, यूके और अमेरिका ने ईरान के परमाणु सहयोग की कमी पर चिंता जताई थी।
