अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ी खबर साझा की है। उन्होंने बताया कि ईरान के साथ एक समझौते पर अगले 48 घंटों के भीतर साइन होने की उम्मीद है। इस डील के बाद दुनिया की नजरें अब स्विट्जरलैंड पर टिकी हैं, जहां आधिकारिक तौर पर कागजों पर मुहर लगने वाली है।
खबर के मुताबिक, इस समझौते के लिए एक मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MOU) तैयार किया गया है। इसकी आधिकारिक साइनिंग सेरेमनी शुक्रवार, 19 जून 2026 को स्विट्जरलैंड में होगी। हालांकि, ट्रंप ने यह भी साफ किया कि 14 जून को डिजिटल तरीके से इस पर साइन किए जा चुके हैं, जिसमें उनके साथ उपराष्ट्रपति JD Vance और ईरान के संसदीय स्पीकर मोहम्मद बागेर गालिबफ शामिल थे।
इस डील का सबसे बड़ा असर समुद्र के रास्ते पर पड़ेगा। राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि इस समझौते से Strait of Hormuz (हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य) को तुरंत फिर से खोल दिया जाएगा। साथ ही, ईरान ने वादा किया है कि वह परमाणु हथियार हासिल नहीं करेगा। ट्रंप ने चेतावनी भी दी है कि यह डील अभी पूरी तरह फाइनल नहीं है और अगर ईरान ने ठीक से व्यवहार नहीं किया, तो अमेरिका फिर से सैन्य कार्रवाई शुरू कर सकता है।
इस पूरी प्रक्रिया में पाकिस्तान और कतर ने अहम भूमिका निभाई है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी इस शुरुआती समझौते और स्विट्जरलैंड में होने वाली मीटिंग की पुष्टि की है। वहीं ईरान के डिप्टी विदेश मंत्री काज़ेम गरीबबादी ने भी बताया कि MOU अब साइन होने के लिए तैयार है।
समझौते की मुख्य बातें
इस 14 पॉइंट के समझौते में कई अहम शर्तें रखी गई हैं, जो ईरान की अर्थव्यवस्था और सुरक्षा से जुड़ी हैं। नीचे दी गई टेबल में इसकी मुख्य जानकारियां दी गई हैं:
| विषय | विवरण |
|---|---|
| सैन्य कार्रवाई | मिलिट्री ऑपरेशन्स को तुरंत और हमेशा के लिए खत्म किया जाएगा। |
| परमाणु हथियार | ईरान परमाणु हथियार नहीं बनाएगा। |
| समुद्री रास्ता | Strait of Hormuz को खोला जाएगा और 60 दिनों तक जहाजों से कोई चार्ज नहीं लिया जाएगा। |
| तेल बिक्री | ईरान को अपना तेल और पेट्रोकेमिकल प्रोडक्ट्स बेचने की इजाजत मिलेगी। |
| इन्वेस्टमेंट फंड | ईरान में निवेश के लिए 300 अरब डॉलर का प्राइवेट फंड बनाया जाएगा। |
| फंड की स्थिति | कुल रकम के आधे से ज्यादा हिस्से का वादा अंतरराष्ट्रीय कंपनियों ने कर दिया है। |
इस बीच, कुछ देशों और ग्रुप्स ने इस पर अपनी चिंता भी जताई है। इसराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने लेबनान से सेना हटाने को लेकर कुछ आपत्तियां जताई हैं। वहीं हिजबुल्लाह के एक प्रवक्ता ने कहा कि परमाणु डील तभी पूरी होगी जब इसराइल अपनी सेना लेबनान से पूरी तरह बाहर निकाल लेगा। फिलहाल, अमेरिकी नौसेना द्वारा ईरान के बंदरगाहों की नाकेबंदी हटाने को लेकर कुछ उलझनें बनी हुई हैं, जिससे शिपिंग कंपनियों में अनिश्चितता है।