अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump और ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने एक बहुत बड़े समझौते पर साइन किए हैं। इस डील के बाद अब उम्मीद जताई जा रही है कि लेबनान, Hezbollah और Israel के बीच चल रही जंग अब पूरी तरह रुक जाएगी। यह समझौता फ्रांस के Versailles महल में G7 समिट के दौरान हुआ है।
क्या है इस समझौते में
इस समझौते को “Islamabad Memorandum of Understanding” नाम दिया गया है। इसमें 14 मुख्य बातें लिखी गई हैं, जिसमें सबसे ज़रूरी बात यह है कि सभी मोर्चों पर सैन्य कार्रवाई को तुरंत और हमेशा के लिए रोका जाए। अगले 60 दिनों तक दोनों देश बातचीत करेंगे ताकि एक अंतिम समझौते पर पहुँचा जा सके।
इस डील के तहत अमेरिका ने Strait of Hormuz से अपनी समुद्री नाकाबंदी हटा ली है। US Central Command (CENTCOM) ने कन्फर्म किया है कि अब ईरानी बंदरगाहों और तटीय इलाकों में आने-जाने वाले जहाजों को रोका नहीं जाएगा। इसके अलावा, ईरान के आर्थिक विकास और पुनर्निर्माण के लिए 300 अरब डॉलर के फंड का प्लान भी बनाया जाएगा, जिसे 60 दिनों के अंदर फाइनल किया जाएगा।
सेना और प्रतिबंधों पर फैसला
समझौते में यह भी कहा गया है कि जब अंतिम डील हो जाएगी, तो उसके 30 दिनों के भीतर अमेरिका अपनी सेना को ईरान के पास वाले इलाकों से हटा लेगा। इस बीच ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को वैसा ही रखेगा जैसा अभी है और अमेरिका भी ईरान पर कोई नया प्रतिबंध (sanction) नहीं लगाएगा।
इजरायल का अलग रुख
जहाँ एक तरफ ट्रंप ने Truth Social पर कहा कि वे सभी मोर्चों पर पूरी तरह युद्धविराम चाहते हैं, वहीं इजरायल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने साफ कह दिया है कि वे इस समझौते से बंधे नहीं हैं। उन्होंने कहा कि जब तक Hezbollah का खतरा पूरी तरह खत्म नहीं होता, वे दक्षिण लेबनान से अपनी सेना नहीं हटाएंगे और वहाँ सुरक्षा बफर बनाए रखेंगे।
समझौते के बावजूद ज़मीनी हालात अभी भी तनावपूर्ण बने हुए हैं। 18 जून को भी दक्षिण लेबनान में इजरायली हमलों में तीन लोगों की मौत हुई और Hezbollah ने भी झड़पों की खबर दी है। वहीं अमेरिकी रक्षा सचिव Pete Hegseth ने चेतावनी दी है कि अगर ईरान ने वादे पूरे नहीं किए, तो अमेरिका फिर से सैन्य कार्रवाई शुरू कर देगा और नाकाबंदी लगा देगा।
अब इस मामले में अगली बड़ी मीटिंग 19 जून को Switzerland में होगी, जहाँ अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधि अगले दौर की बातचीत शुरू करेंगे।