Donald Trump ने ईरान के साथ युद्धविराम (ceasefire) को लेकर एक हैरान करने वाला बयान दिया है। उन्होंने साफ कहा कि वह ईरान के साथ शांति समझौता नहीं करना चाहते थे, लेकिन पाकिस्तान की मदद और अनुरोध के कारण उन्होंने यह कदम उठाया। यह पूरा मामला 2026 के ईरान युद्ध और Strait of Hormuz के संकट के बीच सामने आया है।
Trump ने युद्धविराम को लेकर क्या कहा
Donald Trump ने बताया कि वह ईरान के साथ युद्धविराम जारी रखने के पक्ष में नहीं थे। उन्होंने यहाँ तक कहा कि शांति के बजाय बमबारी करना एक बेहतर विकल्प होता। उनके मुताबिक, यह फैसला उन्होंने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif और आर्मी चीफ Asim Munir के अनुरोध पर लिया। ट्रंप ने ईरान द्वारा भेजे गए शांति प्रस्ताव को पूरी तरह बेकार और अस्वीकार्य बताया।
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव के मुख्य कारण
- युद्धविराम की शुरुआत: अप्रैल 2026 में पाकिस्तान की मध्यस्थता से दोनों देशों के बीच दो हफ्ते का युद्धविराम तय हुआ था।
- समय सीमा का विस्तार: 21 अप्रैल और 25 अप्रैल 2026 को Trump ने पाकिस्तान की रिक्वेस्ट पर इस युद्धविराम को आगे बढ़ाया।
- बंदरगाहों की नाकाबंदी: अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी कर दी, जिससे ईरान ने बातचीत पर सवाल उठाए।
- मौजूदा स्थिति: ट्रंप ने मई 2026 तक यह कह दिया कि युद्धविराम अब बहुत कमजोर स्थिति में है।
इस मामले में पाकिस्तान की क्या भूमिका रही
पाकिस्तान इस पूरे विवाद में अमेरिका और ईरान के बीच एक निष्पक्ष मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा था। पाकिस्तान ने खुद को एक जिम्मेदार सहायक बताया ताकि युद्ध को रोका जा सके। हालांकि, इस बीच CBS News की एक रिपोर्ट आई थी जिसमें दावा किया गया कि पाकिस्तान ने ईरानी सैन्य विमानों को अमेरिकी हमलों से बचाने के लिए पनाह दी। पाकिस्तान ने इन आरोपों को पूरी तरह गलत बताया और कहा कि वे विमान केवल डिप्लोमैटिक बातचीत के लिए वहां थे।
Frequently Asked Questions (FAQs)
अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम कब हुआ था
यह युद्धविराम अप्रैल 2026 में पाकिस्तान की मध्यस्थता से तय हुआ था, जिसे बाद में ट्रंप ने पाकिस्तान के अनुरोध पर आगे बढ़ाया।
Trump ने ईरान के शांति प्रस्ताव के बारे में क्या कहा
Trump ने ईरान के शांति प्रस्ताव को पूरी तरह अस्वीकार्य बताया और इसे ‘कचरा’ (piece of garbage) करार दिया।
