अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के बीच एक समझौते को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। एक तरफ ट्रंप इसे एक बड़ी जीत बता रहे हैं, तो दूसरी तरफ ईरान और भारत के बयानों ने पूरी कहानी बदल दी है। इस तनाव का सीधा असर समुद्र में भारतीय जहाजों और वहां काम करने वाले नाविकों पर पड़ रहा है जिससे हालात गंभीर हो गए हैं।
ट्रंप और ईरान के बीच समझौते पर खींचतान
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि ईरान के साथ एक बड़ा समझौता हो गया है, जिस पर यूरोप में जल्द ही हस्ताक्षर हो सकते हैं। ट्रंप ने कहा कि इस समझौते के मुख्य बिंदुओं पर अमेरिका और कई मध्य पूर्वी देशों की सहमति बन गई है। लेकिन जब इस समझौते की कुछ शर्तें मीडिया में आईं, तो ट्रंप ने उन्हें Fake News करार दिया।
ट्रंप ने कहा कि ईरान ने मीडिया को गलत जानकारी दी है और असल में लिखित शर्तें कुछ और थीं। उन्होंने ईरान के अधिकारियों को बेईमान बताया और कहा कि उनके साथ नेक नीयत से बातचीत करना नामुमकिन है। दूसरी तरफ, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकायी ने इन दावों को खारिज कर दिया। उन्होंने साफ कहा कि अभी किसी अंतिम समझौते पर मुहर नहीं लगी है और दस्तावेज़ों की जांच अभी बाकी है।
खबरों के मुताबिक, यह समझौता एक MOU (समझौता ज्ञापन) हो सकता है, जिसमें ये बातें शामिल हैं:
- स्थायी युद्धविराम करना
- समुद्री नाकाबंदी हटाना
- होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोलना
- अमेरिका की सेनाओं की वापसी
- ईरान की जमी हुई संपत्ति को वापस करना और तेल प्रतिबंध हटाना
भारतीय जहाजों पर हमला और भारत का विरोध
इस पूरे विवाद के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य में भारतीय जहाजों पर हमले की खबर आई है। डोनाल्ड ट्रंप ने सीधे तौर पर ईरान को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि ईरान ने भारतीय जहाजों पर ड्रोन हमला किया जो कि बिल्कुल अस्वीकार्य है।
लेकिन भारत सरकार का रुख इससे बिल्कुल अलग है। भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि भारतीय चालक दल वाले तीन जहाजों पर अमेरिकी सेना (US Navy) ने हमला किया है। इस हमले में तीन भारतीय नाविकों की जान चली गई है। भारत ने इस घटना पर अमेरिका के पास कड़ा विरोध दर्ज कराया है।
संयुक्त राष्ट्र (UN) के महासचिव ने भी MT Settebello टैंकर पर हुए हमले की निंदा की है, जिसमें भारतीय नाविकों की मौत हुई। यह स्थिति उन भारतीयों के लिए चिंताजनक है जो खाड़ी देशों में काम करते हैं या वहां से समुद्री रास्तों से सफर करते हैं, क्योंकि दो बड़ी शक्तियों की लड़ाई में आम नाविकों की जान जा रही है।
