अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने दावा किया है कि ईरान के साथ एक बड़ा समझौता आज यानी 14 जून 2026 को साइन हो जाएगा. ट्रंप के मुताबिक इस डील से ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोका जाएगा और Strait of Hormuz को फिर से सभी जहाजों के लिए खोल दिया जाएगा. हालांकि ईरान की सरकार ने इस बात से इनकार किया है और कहा है कि फैसला अभी बाकी है.

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समझौते की तारीख पर विवाद

राष्ट्रपति Trump ने 13 और 14 जून को बार-बार कहा कि रविवार को ही समझौता साइन होगा. उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि स्थिति शांत होने पर अमेरिकी सेना ईरान के परमाणु मटीरियल को जब्त कर उसे नष्ट कर देगी. दूसरी तरफ ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmaeil Baghaei ने ट्रंप की बात को गलत बताया. उन्होंने कहा कि 14 जून को कोई साइनिंग नहीं होगी, बल्कि यह काम आने वाले कुछ दिनों में हो सकता है. ईरान का कहना है कि वे अभी भी इस समझौते के कानूनी और तकनीकी पहलुओं की जांच कर रहे हैं.

मध्यस्थों की भूमिका और लेबनान का असर

इस पूरी बातचीत में पाकिस्तान और कतर अहम भूमिका निभा रहे हैं. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif ने बताया कि समझौता पहले से कहीं ज्यादा करीब है और 14 जून को इलेक्ट्रॉनिक तरीके से साइनिंग होने की उम्मीद थी. कतर के negotiators भी इस डील को अंतिम रूप देने के लिए 14 जून को तेहरान पहुंचे.

ट्रंप ने बातचीत में देरी का कारण इसराइल द्वारा बेरूत में किए गए हमलों को बताया. उन्होंने सभी पक्षों से शांत रहने की अपील की ताकि शांति समझौते में कोई रुकावट न आए. इसराइल और हिजबुल्लाह के बीच चल रही जंग ने इस डील की राह को मुश्किल बना दिया है.

समझौते की मुख्य बातें

खबरों के मुताबिक यह समझौता दो चरणों वाला एक Memorandum of Understanding (MoU) होगा:

  • पहला चरण: इसमें तुरंत जंग खत्म करना, Strait of Hormuz को खोलना और ईरान पर लगे प्रतिबंधों में ढील देना शामिल है. ईरान अपनी जमी हुई संपत्ति को वापस पाने की कोशिश कर रहा है.
  • दूसरा चरण: अगले 60 दिनों तक परमाणु मुद्दों और अन्य तकनीकी बातों पर चर्चा की जाएगी.

परमाणु मटीरियल पर अनबन

दोनों देशों के बीच सबसे बड़ा विवाद ईरान के पास मौजूद समृद्ध यूरेनियम को लेकर है. Donald Trump चाहते हैं कि इस मटीरियल को पूरी तरह नष्ट कर दिया जाए, जबकि ईरान का कहना है कि इसे ईरान के अंदर ही प्रोसेस किया जाएगा. इसी तनाव के बीच U.S. Central Command ने 13 जून को Strait of Hormuz में ईरान के कई ड्रोन्स को मार गिराया था, जो कमर्शियल जहाजों को निशाना बना रहे थे.