अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump ने ऐलान किया है कि ईरान के परमाणु हथियारों को खत्म करने के लिए Doha में बातचीत होगी. यह खबर ऐसे समय आई है जब अमेरिका और ईरान के बीच काफी तनाव चल रहा है. हालांकि, ईरान ने इन बातों को पूरी तरह गलत बताया है और किसी भी मीटिंग से इनकार किया है.
Donald Trump ने Truth Social पर जानकारी दी कि 30 जून 2026 को Doha, Qatar में यह मीटिंग होनी तय हुई है. उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि इस बातचीत का एकमात्र मकसद यह सुनिश्चित करना है कि ईरान के पास परमाणु हथियार न रहें. White House ने भी X पर इस खबर की पुष्टि की है. बताया गया है कि अमेरिकी टीम की अगुवाई US Special Envoy Steve Witkoff और Senior Adviser Jared Kushner करेंगे, साथ ही तकनीकी टीम से Nick Stewart भी इस बैठक में शामिल होंगे.
दूसरी तरफ ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmaeil Baghaei ने सोमवार को इस दावे को पूरी तरह खारिज कर दिया. उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में Doha में अमेरिका के साथ राजनीतिक या तकनीकी स्तर पर ऐसी कोई बैठक तय नहीं है. ईरान के डिप्टी विदेश मंत्री Kazem Gharibabadi ने भी स्पष्ट किया कि जब तक कुछ शर्तें पूरी नहीं होतीं और मध्यस्थों के जरिए तारीख और जगह तय नहीं होती, तब तक कोई बातचीत नहीं होगी. ईरान का कहना है कि वह अभी अंतिम समझौते के लिए बातचीत शुरू नहीं कर रहा है.
यह पूरा विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब Strait of Hormuz में अमेरिका और ईरान की सेनाओं के बीच तनाव बढ़ा था और गोलीबारी हुई थी. अब खबर है कि दोनों देशों ने अस्थायी तौर पर सैन्य हमलों को रोकने का फैसला किया है ताकि जहाजों की आवाजाही बिना किसी डर के हो सके. इससे पहले 17 जून 2026 को दोनों देशों के बीच एक Memorandum of Understanding (MoU) साइन हुआ था, जिसके तहत विवाद खत्म करने और 60 दिनों तक बातचीत करने की बात कही गई थी.
पैसों को लेकर भी दोनों देशों में खींचतान चल रही है. ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने सोमवार को दावा किया कि Qatar में जमा ईरान की 6 अरब डॉलर की संपत्ति वापस मिल जाएगी. लेकिन अमेरिकी अधिकारियों ने इस दावे को गलत बताया है और Qatar ने भी अभी तक फंड ट्रांसफर की कोई पुष्टि नहीं की है.
Qatar हमेशा से अमेरिका और ईरान के बीच शांति कराने की कोशिश करता रहा है और उसने पहले साइन हुए MoU का स्वागत भी किया था. लेकिन 30 जून की इस खास मीटिंग और परमाणु हथियारों के एजेंडे को लेकर Qatari विदेश मंत्रालय ने अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है.
