अमेरिका और ईरान के बीच इस्लामाबाद में चली लंबी बातचीत पूरी तरह नाकाम रही। राष्ट्रपति Donald Trump ने साफ कह दिया है कि उन्हें इस बात की परवाह नहीं है कि ईरान दोबारा बातचीत की मेज पर आएगा या नहीं। इस विवाद के बाद अब अमेरिका ने Strait of Hormuz में समुद्री नाकाबंदी करने का फैसला लिया है। दोनों देशों के बीच तनाव एक बार फिर बहुत बढ़ गया है।

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इस्लामाबाद में बातचीत क्यों नाकाम हुई?

इस्लामाबाद में करीब 21 घंटे तक चली बातचीत के बाद भी कोई नतीजा नहीं निकला। अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance ने बताया कि ईरान परमाणु हथियार न बनाने की शर्त को मानने के लिए तैयार नहीं था। अमेरिका का मुख्य मकसद यही है कि ईरान किसी भी हाल में परमाणु हथियार न बना पाए। वहीं, ईरान के प्रतिनिधि Mohammad Bagher Qalibaf ने आरोप लगाया कि अमेरिका ने उनके प्रस्तावों पर भरोसा नहीं किया और उनकी मांगें बहुत ज्यादा थीं।

Trump ने अब क्या कड़े कदम उठाने का ऐलान किया है?

राष्ट्रपति Donald Trump ने कहा कि ईरान की सैन्य और मिसाइल ताकत अब बहुत कमजोर हो चुकी है और वह काफी मजबूर स्थिति में है। उन्होंने सोमवार, 13 अप्रैल 2026 से Strait of Hormuz की समुद्री नाकाबंदी शुरू करने का ऐलान किया है। Trump ने चेतावनी दी कि अगर ईरान ने अपना परमाणु कार्यक्रम बंद नहीं किया, तो अमेरिका ईरान के बिजली घरों, पानी के प्लांट और पुलों पर बमबारी कर सकता है। उन्होंने ईरानी नेतृत्व को झूठा बताते हुए कहा कि उन्होंने समुद्री रास्ता खोलने का वादा पूरा नहीं किया।

ईरान का क्या जवाब है और आगे क्या होगा?

ईरान ने अमेरिका के इन फैसलों का कड़ा विरोध किया है। ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने साफ चेतावनी दी है कि अगर अमेरिकी जहाजों ने नाकाबंदी की कोशिश की, तो इसे युद्धविराम का उल्लंघन माना जाएगा और इसका करारा जवाब दिया जाएगा। दोनों देशों के बीच पहले से चल रहा युद्धविराम 22 अप्रैल 2026 को खत्म हो रहा है। इस बीच, पाकिस्तान ने कहा है कि वह दोनों देशों के बीच दोबारा बातचीत शुरू करवाने की कोशिश करता रहेगा ताकि हालात और न बिगड़ें।