अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। राष्ट्रपति Donald Trump ने जानकारी दी है कि ईरान के साथ बातचीत तो चल रही है लेकिन इसकी रफ़्तार बहुत धीमी है। इस बीच अमेरिका ने ईरान के बंदरगाहों की नाकेबंदी कर दी है जिससे पूरे खाड़ी क्षेत्र में डर का माहौल है।

ईरान के साथ बातचीत में क्या दिक्कतें आ रही हैं?

पिछले हफ्ते पाकिस्तान के इस्लामाबाद में 21 घंटे तक लंबी बातचीत चली लेकिन कोई समझौता नहीं हो पाया। अमेरिका की मांग थी कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को 20 साल के लिए पूरी तरह रोक दे और अपना यूरेनियम स्टॉक हटा ले। वहीं ईरान ने सिर्फ 3 से 5 साल की रोक का प्रस्ताव दिया था जिसे Trump ने ठुकरा दिया। हालांकि Trump ने पाकिस्तान के आर्मी चीफ Field Marshal Asim Munir की कोशिशों की काफी तारीफ की है।

नाकेबंदी और सैन्य कार्रवाई का खतरा

बातचीत विफल होने के बाद अमेरिका ने Strait of Hormuz के जरिए ईरान के बंदरगाहों की नाकेबंदी कर दी है। इस ऑपरेशन में 10,000 से ज्यादा अमेरिकी सैनिक और कई युद्धपोत तैनात हैं। Trump ने सख्त चेतावनी दी है कि अगर कोई ईरानी जहाज इस नाकेबंदी को पार करने की कोशिश करेगा तो उसे तुरंत नष्ट कर दिया जाएगा। ईरान ने भी जवाबी धमकी दी है कि ऐसी स्थिति में खाड़ी के कोई भी बंदरगाह सुरक्षित नहीं रहेंगे।

क्षेत्रीय विवाद और अन्य देशों की भूमिका

इस तनाव के बीच लेबनान और इसराइल के बीच वाशिंगटन में सीधी बातचीत शुरू हुई है ताकि Hezbollah के साथ युद्ध रुक सके। फ्रांस के राष्ट्रपति Emmanuel Macron भी दोनों पक्षों को करीब लाने की कोशिश कर रहे हैं। इस पूरे विवाद में शामिल मुख्य देशों की स्थिति नीचे दी गई तालिका में है:

देश/संस्था भूमिका/स्थिति
United States ईरान के बंदरगाहों की नाकेबंदी की और सख्त शर्तें रखीं।
Iran अमेरिकी शर्तों को मानने से इनकार किया और जवाबी कार्रवाई की धमकी दी।
Pakistan बातचीत के लिए जगह मुहैया कराई और मध्यस्थ की भूमिका निभाई।
France बातचीत को फिर से शुरू कराने के लिए राजनयिक प्रयास किए।
Lebanon इसराइल के साथ युद्धविराम के लिए सीधी बातचीत शुरू की।
Russia ईरान के परमाणु स्टॉक को अपने पास रखने का प्रस्ताव दिया।
Saudi Arabia ईरान को परमाणु बातचीत के लिए प्रेरित करने की कोशिश की।