अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान को लेकर एक बड़ा बयान दिया है. उन्होंने साफ़ कहा कि ईरान को अब समझौते की सख्त ज़रूरत है और उसे किसी भी हाल में परमाणु हथियार नहीं बनाने चाहिए. Trump ने ईरान पर चल रही नौसेना की नाकेबंदी को एक बहुत ही असरदार तरीका बताया है.
Trump ने ईरान की किस मांग को किया खारिज?
ईरान ने एक प्रस्ताव दिया था कि अगर वह Strait of Hormuz को फिर से खोलता है और नाकेबंदी हटाई जाती है, तो परमाणु बातचीत को कुछ समय के लिए टाला जा सकता है. Donald Trump ने इस प्रस्ताव को पूरी तरह नकार दिया. उन्होंने कहा कि कोई भी समझौता तभी होगा जब वाशिंगटन की परमाणु चिंताओं को पूरी तरह खत्म किया जाएगा. उनके मुताबिक ईरान को परमाणु हथियार रखने की इजाज़त नहीं दी जा सकती.
नौसेना की नाकेबंदी को Trump ने क्यों बताया असरदार?
Trump ने ईरान पर लगाई गई नौसेना की नाकेबंदी को ‘जीनियस’ और प्रभावी बताया. उनका मानना है कि बमबारी करने के मुकाबले यह दबाव ज़्यादा काम कर रहा है. उन्होंने कहा कि ईरान इस वक्त दबाव की वजह से घुट रहा है और अगर वे शर्तों को नहीं मानते हैं, तो उनके लिए हालात और भी बदतर हो जाएंगे. साथ ही उन्होंने जर्मनी के चांसलर Friedrich Merz की भी आलोचना की और उनसे कहा कि वे ईरान के मामले में दखल देने के बजाय जर्मनी की अपनी समस्याओं और रूस-यूक्रेन युद्ध पर ध्यान दें.
सऊदी अरब और पाकिस्तान की इस मामले में क्या भूमिका रही?
- सऊदी अरब: सऊदी विदेश मंत्रालय ने 8 अप्रैल 2026 को अमेरिका और ईरान के बीच हुए युद्धविराम का स्वागत किया था. सऊदी अरब चाहता है कि एक ऐसा स्थायी समझौता हो जिससे इलाके में स्थिरता आए और Strait of Hormuz खुला रहे.
- पाकिस्तान: अमेरिका और ईरान के बीच शुरुआती युद्धविराम करवाने में पाकिस्तान ने मध्यस्थ की अहम भूमिका निभाई थी.
- CENTCOM: रिपोर्ट्स के मुताबिक US Central Command ने ईरान के ठिकानों पर छोटे और तेज़ हमलों की योजना तैयार की है, हालांकि अभी Trump नाकेबंदी के ज़रिए दबाव बनाने को ज़्यादा अहमियत दे रहे हैं.
Frequently Asked Questions (FAQs)
Donald Trump ने जर्मनी के चांसलर को क्या कहा?
Trump ने चांसलर Friedrich Merz से कहा कि वे ईरान के मामले में हस्तक्षेप न करें और इसके बजाय जर्मनी की आंतरिक समस्याओं और रूस-यूक्रेन संघर्ष पर अपना ध्यान केंद्रित करें.
ईरान और अमेरिका के बीच युद्धविराम में किसकी मदद थी?
अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम करवाने में पाकिस्तान ने मध्यस्थता की थी, जिसका सऊदी अरब के विदेश मंत्रालय ने समर्थन किया था.