अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान के परमाणु हथियारों को खत्म करने की दिशा में बड़े कदम उठाए हैं। 1 जुलाई 2026 को Doha में ईरान और अमेरिका के बीच फिर से बातचीत शुरू हुई है, जिसमें Qatar और Pakistan बीच-बचाव कर रहे हैं। इस पूरे मामले में अमेरिका का दावा है कि उसने ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकने का अपना मुख्य लक्ष्य पूरा कर लिया है।
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इस पूरी प्रक्रिया की शुरुआत 17 जून 2026 को हुई थी, जब राष्ट्रपति Donald Trump और ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने Islamabad Memorandum of Understanding (MOU) पर हस्ताक्षर किए थे। इस समझौते के तहत दोनों देशों ने परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत के लिए 60 दिनों का समय तय किया था।
अमेरिका के उपराष्ट्रपति JD Vance ने जानकारी दी कि ईरान ने UN के परमाणु निरीक्षकों को वापस अपने देश में आने देने पर सहमति जताई है। इसके बदले में अमेरिका ने ईरान के तेल निर्यात पर लगे प्रतिबंधों को कुछ समय के लिए हटाया है। Vance ने कहा कि अब अमेरिका के पास बातचीत में पूरी ताकत है और ईरान को यह तय करना होगा कि वह परमाणु हथियार छोड़कर दुनिया की अर्थव्यवस्था से जुड़ना चाहता है या नहीं।
हालांकि, इस बीच कुछ तनाव भी देखने को मिले। राष्ट्रपति Trump ने आरोप लगाया था कि ईरान ने Strait of Hormuz में जहाजों पर हमला करने के लिए ड्रोन का इस्तेमाल किया, जो समझौते का उल्लंघन था। लेकिन 1 जुलाई की रिपोर्ट बताती है कि Trump अब सैन्य कार्रवाई के बजाय कूटनीति और बातचीत को प्राथमिकता दे रहे हैं और 60 दिनों के युद्धविराम को आगे बढ़ाने के लिए तैयार हैं।
बातचीत के बीच ईरान की अपनी शर्तें भी हैं। ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने कहा है कि बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए अमेरिका को उनके 6 अरब डॉलर के फ्रीज किए गए पैसे वापस करने होंगे।
इस पूरे माहौल के बीच यूरोपीय संघ की विमानन सुरक्षा एजेंसी (EASA) ने एयरलाइंस को चेतावनी दी है कि वे मध्य पूर्व के हवाई क्षेत्र से बचें, क्योंकि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कभी भी बढ़ सकता है।
