अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने साफ़ कर दिया है कि वह ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि दुनिया में आर्थिक मंदी आने का खतरा तो है, लेकिन ईरान के हाथ में परमाणु बम जाना उससे कहीं ज़्यादा खतरनाक है। यह बयान स्विट्जरलैंड में हुई तकनीकी बातचीत के बाद आया है।
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सोमवार, 22 जून 2026 को Trump ने साफ़ शब्दों में कहा कि “परमाणु हथियार मंदी से ऊपर हैं”। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ईरान ने समझौतों का पालन नहीं किया, तो अमेरिका सख्त कदम उठाएगा। राष्ट्रपति ने यह भी संकेत दिया कि अगर ईरान बात नहीं मानता है, तो सैन्य कार्रवाई का विकल्प अभी भी खुला है।
ईरान के साथ हुए नए समझौते की बातें
जून 2026 में एक अंतरिम शांति समझौता (MOU) साइन किया गया था, जिसका मकसद अमेरिका और इसराइल के बीच ईरान के साथ चल रहे टकराव को खत्म करना और Strait of Hormuz को दोबारा खोलना था। इस समझौते के तहत कुछ मुख्य बातें तय हुई हैं:
- ईरान ने वादा किया है कि वह परमाणु हथियार नहीं बनाएगा और न ही उन्हें खरीदेगा।
- Strait of Hormuz के रास्ते को सभी के लिए खुला और सुरक्षित रखा जाएगा।
- International Atomic Energy Agency (IAEA) के निरीक्षकों को ईरान में आने की अनुमति होगी।
- अगले 60 दिनों में यूरेनियम के मैनेजमेंट और उसे कम करने (downblending) पर तकनीकी बातचीत होगी।
आर्थिक मदद और पाबंदियों में ढील
इस डील के तहत अमेरिका और उसके साथियों ने ईरान की मदद के लिए बड़ा प्लान बनाया है। अमेरिकी ट्रेजरी सचिव Scott Bessent ने इस बात की पुष्टि की है कि ईरान ने IAEA को रास्ता देने और समुद्री मार्ग को खुला रखने की बात मानी है।
- ईरान के पुनर्निर्माण और विकास के लिए कम से कम 300 अरब डॉलर का प्लान तैयार किया जाएगा।
- ईरान पर लगी सभी आर्थिक पाबंदियां हटाई जाएंगी।
- ईरानी तेल की बिक्री और डिलीवरी के लिए 60 दिनों का एक अस्थायी लाइसेंस जारी किया गया है।
विशेषज्ञों की राय और चिंताएं
जहां कुछ लोग इस समझौते से खुश हैं, वहीं कई एक्सपर्ट्स ने चेतावनी दी है। Atlantic Council के विशेषज्ञों का कहना है कि Strait of Hormuz का खुलना अच्छी बात है, लेकिन परमाणु हथियारों जैसे मुख्य मुद्दे अभी भी पूरी तरह हल नहीं हुए हैं। Cato Institute की मार्च 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के पास अभी भी काफी मात्रा में समृद्ध यूरेनियम है और उसका परमाणु प्रोग्राम पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। कुछ जानकारों का मानना है कि अगर यह नया सौदा फेल होता है, तो ईरान महज छह महीने के अंदर परमाणु बम तैयार कर सकता है।
