अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के शांति प्रस्ताव को पूरी तरह खारिज कर दिया और इसे कचरा करार दिया। ट्रंप ने साफ कहा कि ईरान किसी भी कीमत पर परमाणु हथियार हासिल नहीं कर पाएगा। इस खींचतान के बीच अब युद्ध का खतरा और बढ़ गया है क्योंकि दोनों देशों के बीच ceasefire अब बहुत कमजोर स्थिति में है।

Trump और अमेरिका ने ईरान के खिलाफ क्या कहा है?

डोनाल्ड ट्रंप ने 11 मई 2026 को कड़े शब्दों में कहा कि ईरान के लोग परमाणु हथियार पाना चाहते हैं, लेकिन ऐसा नहीं होगा। ट्रंप ने ईरान के हालिया शांति प्रस्ताव को पूरी तरह अस्वीकार्य बताया। अमेरिका की मांग है कि ईरान लंबे समय के लिए इस बात की गारंटी दे कि वह परमाणु हथियार नहीं बनाएगा। संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी राजदूत Mike Waltz ने भी कहा कि ट्रंप का रुख साफ है कि ईरान कभी परमाणु हथियार नहीं पाएगा और वह दुनिया की अर्थव्यवस्था को बंधक नहीं बना सकता।

ईरान और इसराइल का इस विवाद पर क्या रुख है?

  • ईरान का पक्ष: ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बक़ाई ने कहा कि उनका शांति प्रस्ताव जायज और उदार था। उन्होंने परमाणु सामग्री को विदेश भेजने से इनकार किया और कहा कि वे सिर्फ अपने वैध अधिकारों की मांग कर रहे हैं।
  • इसराइल की चेतावनी: प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने साफ किया कि जब तक ईरान के पास परमाणु सामग्री और एक्टिव फैसिलिटीज रहेंगी, यह संघर्ष खत्म नहीं होगा। उन्होंने कहा कि अगर बातचीत काम नहीं आई तो अमेरिका और इसराइल मिलकर सैन्य कार्रवाई करेंगे।
  • IAEA की रिपोर्ट: परमाणु एजेंसी IAEA के प्रमुख राफेल ग्रॉसी ने बताया कि फिलहाल ईरान के परमाणु बम बनाने के सबूत नहीं मिले हैं, लेकिन उनके कार्यक्रम को लेकर चिंताएं अभी भी बनी हुई हैं।
  • ईरान की धमकी: ईरान के सांसद डॉ. हसन नत्ताज ने सैन्य ठिकानों पर टैक्टिकल परमाणु बम के इस्तेमाल की बात कही, हालांकि उन्होंने कहा कि यह नागरिकों के खिलाफ नहीं होगा।

Frequently Asked Questions (FAQs)

क्या ईरान के पास परमाणु बम है?

IAEA प्रमुख राफेल ग्रॉसी के अनुसार फिलहाल परमाणु बम बनाने के कोई सबूत नहीं मिले हैं, लेकिन ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर गंभीर चिंताएं बरकरार हैं।

ट्रंप ने ईरान के शांति प्रस्ताव को क्यों खारिज किया?

ट्रंप ने इस प्रस्ताव को पूरी तरह अस्वीकार्य और कचरा बताया क्योंकि इसमें अमेरिका द्वारा मांगी गई परमाणु हथियारों पर लंबे समय तक रोक लगाने की गारंटी नहीं थी।