अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा तनाव अब खत्म होने की कगार पर पहुंच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खाड़ी देशों के नेताओं के साथ ईरान से जुड़े एक शांति समझौते पर चर्चा की है। ट्रंप ने खुद इस बात की पुष्टि की है कि दोनों देश एक शांति समझौते के बहुत करीब आ चुके हैं और इस पर रविवार, 24 मई 2026 तक कोई बड़ा फैसला लिया जा सकता है।

अमेरिका और ईरान के बीच क्या समझौता होने जा रहा है?

दोनों देशों के बीच जिस समझौते (MOU) पर बात चल रही है, उसमें युद्ध को पूरी तरह रोकने की तैयारी है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने बताया कि इस समझौते के तहत हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोला जाएगा, ईरान पर लगे अमेरिकी प्रतिबंध हटाए जाएंगे और ईरान के रोके गए पैसों को भी वापस किया जाएगा। हालांकि, अभी इस शुरुआती समझौते में परमाणु कार्यक्रम से जुड़े मुद्दों को शामिल नहीं किया गया है क्योंकि ईरान पहले युद्ध को पूरी तरह समाप्त करना चाहता है।

राष्ट्रपति ट्रंप और अमेरिकी अधिकारियों ने क्या कहा?

राष्ट्रपति ट्रंप ने मीडिया को बताया कि अमेरिका और ईरान एक समझौते के बहुत करीब आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि समझौते की 50-50 संभावना है, या तो एक अच्छा समझौता होगा या फिर सैन्य कार्रवाई दोबारा शुरू हो सकती है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी बताया कि बातचीत में काफी प्रगति हुई है और जल्द ही कोई बड़ी खबर सामने आ सकती है। इस बातचीत में पाकिस्तान ने भी मध्यस्थ (Mediator) के रूप में एक बहुत बड़ी भूमिका निभाई है।

खाड़ी देशों और इसराइल की इस पर क्या है प्रतिक्रिया?

इस पूरे मामले में सऊदी अरब, कतर, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), मिस्र, तुर्की और जॉर्डन जैसे खाड़ी और क्षेत्रीय देशों के नेता शामिल हैं। इन नेताओं ने फोन पर हुई बातचीत के दौरान ट्रंप को इस समझौते को स्वीकार करने के लिए प्रोत्साहित किया है। वहीं इसराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का कार्यालय भी इस नए समझौते को लेकर लगातार अमेरिकी सरकार के संपर्क में बना हुआ है।

Frequently Asked Questions (FAQs)

क्या इस शांति समझौते में ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर भी चर्चा हो रही है?

नहीं, इस शुरुआती समझौते में परमाणु मुद्दों को शामिल नहीं किया गया है। ईरान की पहली प्राथमिकता युद्ध को रोकना, प्रतिबंध हटवाना और अपने रोके गए पैसों को वापस पाना है।

इस समझौते में पाकिस्तान की क्या भूमिका है?

पाकिस्तान इस पूरी बातचीत में एक मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। पाकिस्तान के सेना प्रमुख ने इस शांति समझौते को सफल बनाने के लिए तेहरान का दौरा भी किया था।