अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ शांति समझौते को लेकर बड़ी उम्मीद जताई है। ट्रंप का कहना है कि एक असली समझौता बहुत करीब है और इसके लिए कल यानी 10 अप्रैल को पाकिस्तान के इस्लामाबाद में औपचारिक बातचीत शुरू होगी। दोनों देशों के बीच फिलहाल दो हफ्ते का युद्धविराम चल रहा है। ट्रंप ने साफ कर दिया है कि जब तक पूरी तरह शांति समझौता लागू नहीं हो जाता, अमेरिकी सेना ईरान के आसपास ही तैनात रहेगी।

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शांति समझौते के लिए ट्रंप ने क्या शर्तें रखी हैं?

ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि किसी भी शांति समझौते में ईरान को परमाणु हथियारों का विचार छोड़ना होगा। राष्ट्रपति ने कहा कि स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज (Strait of Hormuz) को पूरी तरह सुरक्षित और व्यापार के लिए खुला रखना अनिवार्य होगा। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने बताया कि ट्रंप की तरफ से पहले दी गई चेतावनियां कोई दिखावा नहीं थीं। ट्रंप ने यह भी कहा कि ईरान का 10-सूत्रीय शांति प्रस्ताव बातचीत के लिए एक अच्छा आधार है और कई पुराने विवादित मुद्दों पर सहमति बन चुकी है।

बातचीत में शामिल देश और मुख्य चुनौतियां क्या हैं?

पाकिस्तान इस पूरी बातचीत में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है, जिसमें प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और फील्ड मार्शल आसिम मुनीर शामिल हैं। हालांकि, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने चेतावनी दी है कि अगर इसराइल ने लेबनान में हिजबुल्लाह के खिलाफ अपने हमले जारी रखे, तो इस बातचीत का कोई महत्व नहीं रह जाएगा। नीचे दी गई टेबल में समझौते से जुड़ी मुख्य जानकारियों को समझा जा सकता है:

मुख्य बिंदु विवरण
बातचीत की तारीख 10 अप्रैल, 2026
स्थान इस्लामाबाद, पाकिस्तान
अमेरिका की मांग परमाणु हथियारों का त्याग
ईरान की चिंता लेबनान में इसराइली हमले रुकें
मध्यस्थता पाकिस्तान सरकार और सेना
युद्धविराम की अवधि दो सप्ताह (7 अप्रैल से शुरू)

ट्रंप ने यह भी चेतावनी दी है कि लोग केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करें क्योंकि कुछ फर्जी समझौते भी बाजार में घूम रहे हैं। अमेरिका केवल उन्हीं बिंदुओं पर आगे बढ़ेगा जिन्हें उसने मंजूरी दी है। इस समझौते का असर पूरी दुनिया और खासकर खाड़ी देशों में रहने वाले लोगों पर पड़ेगा क्योंकि इससे तेल की सप्लाई और सुरक्षा से जुड़े मामले सुलझ सकते हैं।