अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे लंबे तनाव को खत्म करने के लिए एक बड़े शांति समझौते की तैयारी चल रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने दावा किया है कि ईरान के साथ एक शांति समझौता लगभग तय हो चुका है और दोनों देशों के बीच बातचीत अब पहले से ज्यादा पेशेवर और सही दिशा में आगे बढ़ रही है। हालांकि, राष्ट्रपति Trump ने अमेरिकी अधिकारियों को इस समझौते में जल्दबाजी न करने की सलाह दी है और साफ किया है कि जब तक समझौते पर पूरी तरह हस्ताक्षर नहीं हो जाते, तब तक ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नाकेबंदी जारी रहेगी।

Donald Trump और अमेरिकी अधिकारियों ने समझौते पर क्या कहा?

अमेरिकी प्रशासन की तरफ से इस समझौते को लेकर कई महत्वपूर्ण बातें सामने आई हैं। राष्ट्रपति Donald Trump और उनके मंत्रियों ने वार्ता की प्रगति पर निम्नलिखित जानकारियां दी हैं:

  • शांति का समझौता: राष्ट्रपति Trump ने इसे शांति से जुड़ा एक समझौता ज्ञापन (MoU) बताया है और कहा है कि दोनों देश एक अंतिम समझौते के बहुत करीब हैं।
  • नाकेबंदी रहेगी जारी: उन्होंने स्पष्ट किया है कि जब तक समझौते को प्रमाणित करके उस पर हस्ताक्षर नहीं कर दिए जाते, तब तक ईरान पर प्रतिबंध और समुद्री नाकेबंदी पूरी तरह प्रभावी रहेगी।
  • परमाणु हथियार पर रोक: अमेरिकी राष्ट्रपति ने दोहराया है कि ईरान को किसी भी कीमत पर परमाणु हथियार बनाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
  • विदेश मंत्री का बयान: अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio ने कहा है कि दोनों पक्षों के बीच बातचीत में काफी अच्छी प्रगति हुई है और जल्द ही अच्छी खबर मिल सकती है। उन्होंने कहा कि उनका लक्ष्य बिना किसी शुल्क के Strait of Hormuz को पूरी तरह से व्यापार के लिए खोलना है।

ईरान और इसराइल का इस समझौते पर क्या रुख है?

इस संभावित समझौते को लेकर ईरान और उसके पड़ोसी देशों के अपने अलग-अलग तर्क और शर्तें हैं:

  • ईरान का रुख: ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmail Baghaei ने इसे युद्ध समाप्त करने का एक ढांचागत समझौता बताया है। हालांकि, उन्होंने साफ किया कि परमाणु मुद्दे इस बातचीत का हिस्सा नहीं हैं। ईरान का मुख्य ध्यान प्रतिबंधों को हटवाने और लेबनान सहित सभी मोर्चों पर संघर्ष को खत्म करने पर है।
  • इसराइल की मांग: इसराइली प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने अमेरिकी राष्ट्रपति से सहमति जताई है कि किसी भी अंतिम समझौते में ईरान के परमाणु खतरे को पूरी तरह से खत्म किया जाना चाहिए, जिसमें उनके यूरेनियम संवर्धन संयंत्रों को बंद करना शामिल है।
  • अंतरराष्ट्रीय समर्थन: ब्रिटेन के प्रधानमंत्री Keir Starmer और यूरोपीय संघ की प्रमुख Ursula von der Leyen ने इस समझौते की दिशा में हो रही प्रगति का स्वागत किया है।

60 दिनों के युद्धविराम और समझौते का संभावित प्रारूप क्या है?

खबरों के अनुसार, पर्दे के पीछे एक 60 दिनों के युद्धविराम समझौते पर काम चल रहा है। इस योजना के तहत निम्नलिखित कदम उठाए जा सकते हैं:

  • Strait of Hormuz का खुलना: 60 दिनों के भीतर चरणबद्ध तरीके से Strait of Hormuz को खोला जाएगा और इसके समानांतर अमेरिका ईरान के बंदरगाहों से अपनी नाकेबंदी हटाएगा।
  • तेल की बिक्री और फंड: ईरान को प्रतिबंधों में छूट के जरिए तेल बेचने की अनुमति मिल सकती है, और इस 60 दिनों की अवधि के दौरान ईरान के जमे हुए फंड को जारी करने पर बातचीत की जाएगी।
  • मध्यस्थ देश: इस पूरे शांति समझौते में पाकिस्तान मुख्य मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है, जिसमें सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), कतर, तुर्की, मिस्र और जॉर्डन जैसे देश भी मदद कर रहे हैं।

Frequently Asked Questions (FAQs)

क्या अमेरिका और ईरान के बीच नया शांति समझौता फाइनल हो चुका है?

अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump के अनुसार समझौता लगभग पूरी तरह बातचीत के जरिए तय हो चुका है, लेकिन इस पर अंतिम रूप से हस्ताक्षर होना अभी बाकी है।

क्या समझौते के बाद ईरान पर लगे अमेरिकी प्रतिबंध तुरंत खत्म हो जाएंगे?

नहीं, जब तक समझौते पर औपचारिक रूप से हस्ताक्षर नहीं हो जाते, तब तक ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नाकेबंदी और सभी प्रतिबंध पूरी तरह लागू रहेंगे।

इस शांति समझौते में कौन से देश मध्यस्थता कर रहे हैं?

इस समझौते को सफल बनाने के लिए पाकिस्तान मुख्य भूमिका में है, जिसे सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), कतर और तुर्की जैसे क्षेत्रीय देशों का भी समर्थन मिल रहा है।