अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ईरान द्वारा भेजे गए एक नए शांति प्रस्ताव की जांच कर रहे हैं. यह 14 पॉइंट वाला प्लान पाकिस्तान के जरिए अमेरिका तक पहुँचाया गया था. ट्रंप का कहना है कि वह इस प्लान की समीक्षा करेंगे लेकिन उन्हें नहीं लगता कि कोई डील हो पाएगी.

🗞️: Tel Aviv में भारी विरोध प्रदर्शन, बेंजामिन नेतन्याहू की सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतरे लोग, युद्ध खत्म करने की उठी आवाज

ईरान की 14 पॉइंट की मांगों में क्या खास है?

ईरान ने अमेरिका के सामने कई शर्तें रखी हैं ताकि युद्ध को पूरी तरह खत्म किया जा सके. उनकी मुख्य मांगें इस प्रकार हैं:

  • अमेरिकी सेना की वापसी: ईरान चाहता है कि अमेरिका अपनी सेना को इस पूरे इलाके से हटा ले.
  • ब्लॉकड हटाना: Strait of Hormuz पर लगी अमेरिकी नौसेना की पाबंदी को खत्म करना.
  • पैसा और प्रतिबंध: ईरान के फ्रीज किए गए पैसों को वापस करना और सभी आर्थिक प्रतिबंध हटाना.
  • हर्जाना और शांति: युद्ध के नुकसान का हर्जाना देना और लेबनान में लड़ाई को रोकना.
  • परमाणु बातचीत: प्रतिबंध हटाने के बदले ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम पर चर्चा करने को तैयार है.

Trump का क्या रुख है और युद्ध की मौजूदा स्थिति क्या है?

राष्ट्रपति Donald Trump ने 1 मई 2026 को अमेरिकी कांग्रेस को पत्र लिखकर युद्ध खत्म होने की घोषणा की थी. उन्होंने कहा कि 7 अप्रैल से युद्धविराम लागू है. हालांकि, ट्रंप ईरान के नए प्रस्ताव से संतुष्ट नहीं हैं. उनका मानना है कि ईरान ने अपनी पुरानी गलतियों की बड़ी कीमत नहीं चुकाई है. इसी बीच अमेरिका ने Israel, Qatar, Kuwait और UAE को 8.6 बिलियन डॉलर के सैन्य हथियार बेचने की मंजूरी दी है.

ईरान की सेना और नौसेना की क्या तैयारी है?

ईरान की सेना ने चेतावनी दी है कि अमेरिका और Israel के साथ युद्ध फिर से शुरू होना मुमकिन है. उन्होंने कहा कि उनकी सेना वाशिंगटन की किसी भी नई हरकत का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है. ईरान ने Strait of Hormuz की अमेरिकी नाकाबंदी को युद्धविराम का उल्लंघन बताया है.

Frequently Asked Questions (FAQs)

ईरान का शांति प्रस्ताव अमेरिका तक कैसे पहुँचा?

ईरान का यह 14 पॉइंट वाला प्रस्ताव पाकिस्तान के जरिए मध्यस्थता करते हुए अमेरिका को भेजा गया था.

डोनाल्ड ट्रंप ने युद्ध को लेकर क्या घोषणा की?

ट्रंप ने 1 मई 2026 को कांग्रेस को लिखे पत्र में युद्ध को समाप्त बताया क्योंकि 7 अप्रैल से युद्धविराम चला आ रहा है.