अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने की उम्मीद जगी है। व्हाइट हाउस ने बताया कि राष्ट्रपति Donald Trump और उनकी नेशनल सिक्योरिटी टीम ईरान के शांति प्रस्ताव पर चर्चा कर रही है। यह खबर ऐसे समय आई है जब दोनों देशों के बीच कड़ा मुकाबला चल रहा है और दुनिया की नज़रें इस डील पर टिकी हैं।

ईरान ने अमेरिका के सामने क्या शर्तें रखी हैं?

ईरान ने पाकिस्तान के ज़रिए अपना नया प्रस्ताव अमेरिका को भेजा है। इस प्रस्ताव में मुख्य रूप से ये बातें कही गई हैं:

  • Strait of Hormuz: इस समुद्री रास्ते को फिर से खोलना।
  • युद्धविराम: मौजूदा युद्धविराम को आगे बढ़ाना या संघर्ष को पूरी तरह खत्म करना।
  • परमाणु बातचीत: परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी बातचीत को फिलहाल के लिए आगे बढ़ाना।
  • नाकेबंदी: अमेरिका द्वारा ईरानी बंदरगाहों की गई नाकेबंदी को खत्म करना।

खास बात यह है कि ईरान ने शुरुआत में अपने परमाणु कार्यक्रम पर कोई बड़ी छूट देने की बात नहीं कही है।

अमेरिका और राष्ट्रपति ट्रंप का इस पर क्या स्टैंड है?

व्हाइट हाउस की प्रवक्ता Olivia Wales ने कहा कि इस समय बहुत संवेदनशील डिप्लोमैटिक बातचीत चल रही है। उन्होंने साफ़ किया कि अमेरिका प्रेस के ज़रिए मोलभाव नहीं करेगा और ऐसी डील ही होगी जिसमें अमेरिकी हितों का ध्यान रखा जाए और ईरान परमाणु हथियार न बना सके।

प्रेस सचिव Karoline Leavitt ने कन्फर्म किया कि राष्ट्रपति Trump ने सोमवार सुबह अपनी सुरक्षा टीम के साथ बैठक की। ट्रंप ने पहले कहा था कि ईरान ने अब एक बेहतर प्रस्ताव भेजा है, लेकिन उन्होंने यह भी साफ़ कर दिया कि ईरान के लिए उनकी ‘रेड लाइन्स’ अभी भी वही हैं। अमेरिका का मानना है कि बिना परमाणु छूट के इस प्रस्ताव को मानना मुश्किल होगा।

ईरान के अंदर की स्थिति और बिचौलियों की भूमिका

ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने संकेत दिया कि देश के नेतृत्व में इस बात पर सहमति नहीं बन पाई है कि अमेरिका की मांगों का जवाब कैसे दिया जाए। वहीं, ईरानी राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री को साफ़ कह दिया कि वे दबाव में आकर या नाकेबंदी के बीच किसी भी बातचीत में शामिल नहीं होंगे।

इस पूरी प्रक्रिया में पाकिस्तान, मिस्र, तुर्की और कतर जैसे देश बिचौलिए का काम कर रहे हैं, जिन्होंने ईरान का प्रस्ताव अमेरिका तक पहुँचाया।