अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान के शासन को लेकर एक बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि अमेरिका चाहता तो एक ही झटके में ईरान के शासन को खत्म कर सकता था. लेकिन उन्होंने बातचीत का रास्ता चुना ताकि समझौते के लिए सामने कोई रहे. यह बयान ऐसे समय में आया है जब ईरान में पूर्व सर्वोच्च नेता Ayatollah Ali Khamenei के अंतिम संस्कार की रस्में चल रही हैं.

बातचीत और सैन्य शक्ति पर बयान

4 जुलाई को एक भाषण के दौरान Trump ने कहा कि उन्होंने ईरान को खमनेई के अंतिम संस्कार के लिए बातचीत से एक हफ्ते की छूट दी है. उन्होंने कहा कि ईरान अब समझौते के लिए बेताब है. Trump ने इस पूरे विवाद को युद्ध नहीं बल्कि ईरान से परमाणु हथियार हटाने की एक प्रक्रिया बताया.

इससे पहले 3 जुलाई को CNBC को दिए इंटरव्यू में Trump ने दावा किया कि ईरान लगभग उन सभी बातों पर सहमत हो गया है जो अमेरिका चाहता था. उन्होंने ईरान को एक बिगड़े हुए बच्चे और मिडिल ईस्ट के दादा की तरह बताया. Trump ने कहा कि अमेरिकी सेना ने उन्हें पूरी तरह हरा दिया है और अगर वे चाहें तो ईरान की बची हुई मिसाइलों को भी खत्म कर सकते हैं.

ईरान में तनाव और विरोध

ईरान में इस समय माहौल काफी तनावपूर्ण है. पूर्व सर्वोच्च नेता Ayatollah Ali Khamenei की मौत फरवरी 2026 में एक हवाई हमले में हुई थी जिसमें अमेरिका और इसराइल शामिल थे. 4 जुलाई को तेहरान में अंतिम संस्कार के दौरान लोगों ने अमेरिका के खिलाफ नारे लगाए और बदले की मांग की. ईरान ने अमेरिका और इसराइल को चेतावनी दी है कि अंतिम संस्कार के समय किसी भी तरह की गलती भारी पड़ेगी.

समझौते की कोशिशें और समय सीमा

अमेरिका और ईरान के बीच कतर और पाकिस्तान की मदद से बातचीत चल रही है. 17 जून 2026 को दोनों देशों के बीच एक समझौता हुआ था जिससे युद्धविराम को 60 दिनों के लिए आगे बढ़ाया गया. इस बातचीत का मुख्य मकसद ईरान के परमाणु कार्यक्रम, जमी हुई संपत्ति और प्रतिबंधों में ढील देना है. इस पूरी प्रक्रिया की समय सीमा 16 अगस्त तय की गई है.

Donald Trump ने साफ किया है कि उनके लिए दो बातें सबसे जरूरी हैं. पहली यह कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) अंतरराष्ट्रीय जहाजों के लिए खुला रहे और दूसरी यह कि ईरान के पास कोई परमाणु हथियार न हो. इस दिशा में ब्रिटेन और फ्रांस भी ओमान के साथ मिलकर काम कर रहे हैं.