अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने दावा किया है कि ईरान के साथ एक बहुत बड़ा समझौता हो गया है। इस डील से दोनों देशों के बीच लंबे समय से चल रहा तनाव खत्म हो सकता है। बताया जा रहा है कि इस समझौते पर यूरोप में इस हफ्ते के अंत तक साइन हो सकते हैं।

Trump ने क्या दावे किए

Donald Trump ने ओवल ऑफिस और Truth Social पर बताया कि ईरान के साथ युद्ध को खत्म करने के लिए एक समझौता हुआ है। उन्होंने कहा कि इस डील का सबसे बड़ा मकसद यह है कि ईरान कभी भी परमाणु हथियार (nuclear weapon) नहीं बना पाएगा।

Trump के मुताबिक, अमेरिका अब ईरान के बंदरगाहों से अपनी नाकाबंदी हटा लेगा और हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोल दिया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि पहले उन्होंने ईरान पर सैन्य हमले की धमकी दी थी, लेकिन अब बातचीत में तरक्की होने के कारण उन हमलों को रद्द कर दिया गया है।

इस समझौते को एक ‘मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग’ (MoU) बताया गया है, जो अभी वैचारिक स्तर पर है लेकिन काफी विस्तृत है।

ईरान और इसराइल का क्या कहना है

एक तरफ जहाँ Trump इस डील को लेकर उत्साहित हैं, वहीं दूसरी तरफ ईरान ने इसे पूरी तरह स्वीकार नहीं किया है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmaeil Baghaei ने कहा कि अभी कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है और ईरान अपनी ‘रेड लाइन्स’ से समझौता नहीं करेगा। उन्होंने साइनिंग सेरेमनी की खबरों को केवल अटकलें बताया है।

ईरान के यूएन राजदूत Amir Saeid Iravani ने Trump की धमकियों को खारिज करते हुए कहा कि डर या ताकत के दम पर कोई स्थायी समझौता नहीं हो सकता।

वहीं, इसराइल ने भी इस समझौते को मान्यता देने से इनकार कर दिया है। प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu के ऑफिस ने साफ किया कि इसराइल इस MoU का हिस्सा नहीं है।

इन देशों की रही भूमिका

इस पूरे मामले में Qatar और Pakistan ने मध्यस्थ (mediators) के रूप में काम किया है। Trump ने दावा किया कि इस समझौते को सऊदी अरब, UAE, तुर्की और मिस्र जैसे क्षेत्रीय साझेदारों की मंजूरी मिल गई है, हालांकि ईरान और इसराइल ने इस बात का खंडन किया है।

Aanya

Aanya is Ex IndiaTV Journalist. She covers Expats oriented news, views and interviews With deep understanding of what Hindi Speaking people needs as updates in daily life to avoid fines, comply rules and stay updated.