अमेरिका और ईरान के बीच पिछले दो महीनों से चल रहा युद्ध अब एक नए मोड़ पर है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान को बातचीत के लिए खुला न्योता दिया है और कहा है कि ईरान उन्हें फोन कर सकता है। इसी बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची रूस पहुंच गए हैं ताकि इस गंभीर स्थिति पर चर्चा की जा सके।

ट्रम्प ने बातचीत के लिए क्या शर्त रखी है?

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने फॉक्स न्यूज पर एक बातचीत के दौरान कहा कि ईरान अगर बात करना चाहता है तो वह उन्हें फोन कर सकता है। हालांकि उन्होंने यह साफ कर दिया कि किसी भी समझौते के लिए सबसे बड़ी शर्त यह होगी कि ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं होने चाहिए। ट्रम्प ने अपने दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर की इस्लामाबाद यात्रा को भी रद्द कर दिया और सुझाव दिया कि ईरान अब खुद फोन करे या सीधे वॉशिंगटन आए।

ईरान के मंत्री रूस क्यों गए और उनकी क्या मांग है?

  • रूस दौरा: ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची 27 अप्रैल 2026 को सेंट पीटर्सबर्ग पहुंचे जहां उन्होंने राष्ट्रपति पुतिन और अन्य अधिकारियों के साथ बैठक की।
  • दबाव और मांग: ईरान का कहना है कि अमेरिका की मांगें बहुत ज्यादा हैं जिसकी वजह से बातचीत में देरी हो रही है।
  • राष्ट्रपति का बयान: ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन ने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से फोन पर बात करते हुए कहा कि वे किसी दबाव या धमकी में आकर बातचीत नहीं करेंगे। उन्होंने मांग की कि अमेरिका को पहले समुद्री नाकेबंदी खत्म करनी होगी।

समुद्री नाकेबंदी और क्षेत्रीय स्थिति का क्या हाल है?

US सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने 27 अप्रैल को जानकारी दी कि समुद्री नाकेबंदी के बाद से अमेरिकी सेना ने 38 जहाजों को रोका और उनका रास्ता बदला है ताकि वे ईरानी बंदरगाहों में न जा सकें। ईरान ने एक नया प्रस्ताव दिया है जिसमें उन्होंने कहा है कि पहले समुद्र में तनाव कम किया जाए और परमाणु बातचीत को बाद के लिए टाला जाए। इस बीच ओमान और पाकिस्तान दोनों देश अमेरिका और ईरान के बीच बीच-बचाव की कोशिश कर रहे हैं।