अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव, राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा- ईरान से बातचीत जारी, सैन्य हमले से बचना पहली पसंद

अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने 5 अगस्त 2026 को एक बड़ा बयान देते हुए दुनिया को बताया कि वाशिंगटन और तेहरान के बीच बातचीत चल रही है। राष्ट्रपति ट्रंप ने साफ़ किया कि वे सैन्य कार्रवाई के बजाय बातचीत के जरिए समाधान निकालने को प्राथमिकता दे रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि ईरान ने खुद ही बातचीत की पहल की है, यह तब हुआ जब अमेरिका ने अपने इतिहास के अब तक के सबसे बड़े सैन्य हमले की तैयारी पूरी कर ली थी। ट्रंप ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य यानी Strait of Hormuz को जल्द ही खोल दिया जाएगा, अन्यथा ईरान को भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। उन्होंने दोहराया कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
बातचीत और दावों का दौर
राष्ट्रपति Donald Trump ने बताया कि 4 अगस्त 2026 को पूरे दिन ईरान के साथ काफी अच्छी बातचीत हुई है। संभावना है कि 5 या 6 अगस्त तक Strait of Hormuz को लेकर कोई बड़ा समझौता सामने आ सकता है। हालांकि, स्थिति तब उलझ गई जब ट्रंप ने आरोप लगाया कि ईरानी अधिकारी सार्वजनिक तौर पर इन बातचीत से इनकार कर रहे हैं। दूसरी ओर, ईरान के सरकारी मीडिया और रिवोल्यूशनरी गार्ड्स से जुड़ी वेबसाइटों का कहना है कि ईरान किसी भी तरह के दबाव या धमकी में आकर कोई समझौता नहीं करेगा।
क्षेत्रीय तनाव और सुरक्षा के मायने
इस बीच, ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड कमांडर Ahmad Vahidi ने 5 अगस्त 2026 को बयान दिया कि जब तक अमेरिका और इजरायल के पास परमाणु हथियार हैं, ईरान भी अपने परमाणु कार्यक्रम को जारी रखेगा। हालांकि, उसी दिन अमेरिका के वित्त विभाग यानी U.S. Treasury Department ने ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड से जुड़े दो विमानों और तीन एयरलाइंस पर लगे आतंकवाद विरोधी प्रतिबंधों को हटा लिया है। ओमान इस मामले में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है, जबकि मिस्र और ग्रीस ने दोनों देशों से शांति बनाए रखने की अपील की है।
आम नागरिकों और खासकर खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों के लिए यह स्थिति चिंताजनक है। CBS News की रिपोर्ट के मुताबिक, इस संघर्ष के दौरान अमेरिका ने अपने पास मौजूद लगभग सभी लंबी दूरी के सटीक मिसाइल भंडार का इस्तेमाल कर लिया है। यमन में ईरान समर्थित हौथी विद्रोहियों ने Saudi अरब के दो तेल टैंकरों पर हमले का दावा किया है। इन घटनाओं से क्षेत्र में व्यापार और सुरक्षा पर सीधा असर पड़ सकता है, जिससे वहां काम करने वाले लाखों भारतीय प्रवासियों के लिए अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। ओमान की मध्यस्थता पर अब सबकी नजरें टिकी हैं कि क्या यह तनाव बातचीत से सुलझेगा या क्षेत्र में और बड़ी हलचल होगी।