अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान को एक बार फिर कड़ा संदेश दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान के पास अब केवल दो ही रास्ते बचे हैं, या तो वह अमेरिका के साथ एक व्यापक समझौते पर हस्ताक्षर करे या फिर उसे बड़े सैन्य नतीजों का सामना करना होगा। यह चेतावनी शुक्रवार को ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य टकराव के बाद सामने आई है, जिसमें दोनों देशों ने एक-दूसरे के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है।
तनाव के बीच खाड़ी देशों पर असर
शुक्रवार को अमेरिका ने ईरान में मिसाइल हमले किए, जिसके जवाब में ईरान ने बहरीन, जॉर्डन और कुवैत में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ड्रोन हमले किए। इस टकराव का असर तेल के कारोबार पर भी पड़ा है। Strait of Hormuz से गुजरने वाले टैंकरों की संख्या 7 मई के बाद अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है। संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने भी इस पूरे घटनाक्रम पर चिंता जताई है क्योंकि हूती विद्रोहियों ने लाल सागर में तेल टैंकरों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है।
समझौता वार्ता और अमेरिकी रुख
ईराक के प्रधानमंत्री Ali al-Zaidi के जरिए पेश किए गए युद्धविराम के प्रस्ताव को ईरान ने ठुकरा दिया है। ईरान का कहना है कि वे ऐसे किसी अस्थायी समझौते को स्वीकार नहीं करेंगे जिससे Strait of Hormuz पर नियंत्रण का मुद्दा अधूरा रहे। वहीं, अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio ने दावा किया कि ईरान युद्धविराम के लिए दबाव में है, जबकि राष्ट्रपति ट्रंप ने साफ कहा कि चीन और रूस का ईरान को हथियार बेचना उनके हित में नहीं होगा। अमेरिका ने यह भी चेतावनी दी कि जहाजों को जो भी नुकसान होगा, उसकी भरपाई अमेरिका के पास मौजूद Iranian money से की जाएगी। अमेरिकी सीनेट ने 47 के मुकाबले 49 वोटों से ईरान में सैन्य कार्रवाई रोकने वाला प्रस्ताव खारिज कर दिया है।
